Monday , 26 July 2021

सात साल में तस्करों ने चुराई चार हजार ट्रक खैर की लकड़ी

भोपाल (Bhopal) . प्रदेश के जंगल कत्था बनाने के काम आने वाले खैर की लकड़ी की तस्करी का बड़ा केंद्र बना है. बीते कुछ सालों में यहां से चार हजार ट्रक लकडिय़ां तस्करों ने चुराई और विभिन्न फैक्टरियों को सप्लाय की है. यह खुलासा दो महीने तस्करों से पूछताछ के बाद हुआ है. जानकारी के मुताबिक कई राज्यों में खैर की लकड़ी के लिए तस्कर सक्रिय हैं. मामले में स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) बड़े रैकेट की पड़ताल में जुटी है, जिसमें तस्करों के तार हरियाणा (Haryana) के एक बड़े कारोबारी से जुड़े है. ये पान मसाला बनाने वाली कंपनी के लिए कत्था बनाकर सप्लाय करता है. उधर अब खैर बचाने में वन विभाग गंभीर हो चुका है.

80 प्रकरण में 95 आरोपित

कुछ सालों में खैर की तस्करी व अवैध व्यापार को लेकर प्रदेश में माफियाओं पर कार्रवाई चल रही है. वन विभाग और एसटीएसएफ दोनों अलग-अलग कार्रवाई करने में लगे है. छिंदवाडा, देवास, भोपाल (Bhopal) , सतना, जबलपुर, ग्वालियर (Gwalior) सहित कई वनक्षेत्र से खैर की लकडिय़ां चोरी हो चुकी है. तीन साल में 80 से ज्यादा प्रकरण बनाए है, जिसमें 95 आरोपितों को पकड़ा गया है. अकेले एसटीएसएफ ने नवंबर 2018 से लेकर अभी तक पूरे प्रदेश में 50 से ज्यादा प्रकरण दर्ज किए गए हैं. 69 आरोपियों को अलग-अलग राज्यों से पकड़ा है, जिनसे 21 वाहन भी जप्त किए हैं. यहां तक कुछ वाहनों को राजसात करने की प्रक्रिया हो चुकी है. अभी तक 324 मैट्रिक टन खैर की लकड़ी जप्त की है. आरोपियों से पूछताछ में बीते तीन साल में प्रदेश के जंगल से खैर बड़ी मात्रा में चुराया गया है, जिसमें करीब चार हजार ट्रक लकडिय़ां दूसरे राज्यों में भिजवाई है.

कई राज्यों के गिरोह सक्रिय

जनवरी 2020 में देवास स्थित खिवनी अभयारण्य से वनपोज खैर के पेड़ काटने और अवैध परिवहन को लेकर वन विभाग ने कार्रवाई की. अगले दिन ही एसटीएसएफ ने प्रकरण की जांच अपने हाथ में ली. नियमानुसार अभयारण्य में वन्यप्राणि व वनपोज से जुड़े अपराध की जांच एसटीएसएफ कर सकता है. खिवनी अभयारण्य से खैर तस्करी में पिछले साल ही छह लोगों को गिरफ्तार किया. सूत्रों के मुताबिक जांच में तस्करी के बाद लकडिय़ां कई राज्यों में पहुंचने की बात गिरोह ने कबूली. गुजरात (Gujarat), हरियाणा (Haryana) , महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान (Rajasthan)की फैक्टरियों में लकडिय़ां सप्लाय हुई, जिसमें हरियाणा (Haryana) के भाजपा नेता के भानजे की फैक्टरी भी शामिल है. यहां से एक कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया है. जनवरी 2021 में एसटीएसएफ ने एक ट्रक संचालक विनोद कटियार को पकड़ा. बताया जाता है कि कई बड़े कारोबारियों के नाम सामने आए है.

पान मसाला कंपनियां भी शामिल

तस्करों से पूछताछ में कई चौंकाने वाली जानकारी मिली है. फैक्टरियों में खैर की लकडिय़ां पहुंचने के बाद इनसे कत्था निकाला जाता है. इसे पान मसाला बनाने वाली कंपनियों को भेजते हैं. हरियाणा (Haryana) के जिस कारोबारी का नाम प्रकरण में शामिल है. इसकी फैक्टरी से भी कत्थे के लिए कंपनी को निरंतर खैर सप्लाय हुआ है. एसटीएसएफ इस कारोबारी को पकडऩे में दिलचस्पी नहीं दिखा रही है. सूत्रों के मुताबिक कारोबारी को बचाने के लिए एसटीएसएफ के अधिकारियों से रोहित नामक का व्यक्ति संपर्क बनाए है.

खैर में पहले स्थान पर प्रदेश

देश में सबसे अधिक 1.67 प्रतिशत खैर के जंगल मध्य प्रदेश में है, जबकि पश्चिम बंगाल, उत्तरप्रदेश (Uttar Pradesh), राजस्थान (Rajasthan)में भी खैर के पेड़ मौजदू है. अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आइयीपीएन) ने दुनियाभर में पेड़ों की जिन प्रजातियों को खतरे में माना था उसमें खैर भी शामिल है. प्रदेश में खैर की चोरी होने के बावजूद वन विभाग की सक्रीयता थोड़ी कम नजर आती है. बताया जाता है कि कई स्थानों पर तस्कर क्षेत्रीय वनकर्मियों से सांठगांठ बनाए है.

पांच हजार रुपये प्रति क्विंटल

पान मसाले और कैमिकल के लिए इस्तेमाल होने वाली खैर की लकड़ी काफी महंगी बिकती है. पांच हजार रुपये प्रति क्विंटल मूल्य में लकड़ी बिकती है. मांग अधिक होने पर तस्कर इसकी कीमत भी बढ़ा देते है.

जंगलों में बढाई सर्चिंग

खैर की तस्करी को लेकर वन विभाग और एसटीएसएफ मिलकर काम कर रहा है. वन विभाग ने जंगल में सर्चिंग बढ़ाई है और एसटीएसएफ तस्करों से पूछताछ कर गिरोह का पता लगाने में जुटे है. कारोबारी पर शिकंजा कसने के लिए सबूत जुटाने का काम किया जा रहा है.
– अलोक कुमार, पीसीसीएफ, वाइल्ड लाइफ व एसटीएफएस प्रमुख

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