Wednesday , 2 December 2020

मध्य प्रदेश में तो थानेदारों ने डी.जी.पी. को हटवा दिया था…!

नईम कुरेशी
मध्य प्रदेश के 28 सीटों के उपचुनावों के चलते पूरे सूबे में प्रशासन इसकी तैयारियों में जुटा है. खासतौर से पुलिस (Police) प्रशासन ग्वालियर में इसका फायदा गुण्डे मवाली महिलाओं को बेटियों को छेड़ने व आम लोगों को सरेआम मारपीट करने में जुटे हुए हैं. कोरोना काल में जहां आम आदमी अपनी जान बचाने में लगा है अस्पतालों के चक्कर काट रहा है वहीं प्रशासन के लोग मूकदर्शक बने हुए हैं. ग्वालियर के थाटीपुर, हजीरा, इन्दरगंज व बहोड़ापुर थानों की पुलिस (Police) अपने ही बोझ से दबी हुई देखी जा रही है.

आमतौर से ग्वालियर के ज्यादातर थानों में सियासत के चलते 1-2 महीनों में भी थानों के प्रभारी बदल दिये जा रहे हैं. कहीं कोई विधायक अपनी मर्जी व जाति बिरादरी के थानेदार रखने पर बदल दिये जा रहे हैं कहीं पैसा कमाने की अंधी होड़ में थानेदार लोग आम लोगों को झूठा फंसाकर उन पर इनाम घोषित कर आम जनता में खौफ फैलाने के चलते हटाये जा रहे हैं. जनकगंज क्षेत्र के थाने में विधायक दक्षिण लश्कर के संरक्षण में उनकी जाति के पदस्थ थानेदारों का आम जनता के पिछड़ी जाति दलितों आदि में भय का वातावरण देखा जा रहा है.

कुछ दर्जन वोटों से जीते लश्कर के विधायक अपने क्षेत्र के जनकगंज, कम्पू कोतवाली आदि क्षेत्र में अपनी जाति के थानेदारों को नियुक्त कराने पर अड़े थे जिससे थानेदार बेलगाम होकर खूब पैसा बनाने में लगे देखे जा रहे हैं. ऊपर से आम चुनावों के चलते पुलिस (Police) वाले अपनी नौकरियां बचाने के चलते महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों, गुण्डों, असामाजिक तत्वों पर ध्यान नहीं दे पा रही है. जब तक अखबार में बड़ी से बड़ी खबर न छप जाये पुलिस (Police) वाले किसी गुण्डे को शिकायतें आने पर भी बोलते नहीं हैं.

उधर सरकार (Government) भी लाचार बनी हुई है. उसके प्रबन्धक जिलों में संभागों में तैनाती करने में विधायकों, सांसदों व थैली शाहों की सिफारिशों पर ही अफसरों की तैनाती करने को मजबूर हैं. पिछली कमलनाथ सरकार (Government) में तो एक महिला पुलिस (Police) अधिकारी सेटिंग कराके ही पदस्थापना कराने पर चर्चा में रही थीं. एक साल से 69 बैच के आय.पी.एस. भिण्ड, ग्वालियर, छतरपुर, सागर में पुलिस (Police) कप्तान रहे राजेन्द्र चतुर्वेदी भ्रष्टाचारों के चलते भोपाल (Bhopal) जेल में बंद हैं. 12 विभागीय जांचों के चलते चतुर्वेदी को ए.डी.जी. तक पदोन्नत कर दिया गया था. हैरत है इसके बाद 86 बैच के शर्मा जी को अपनी पत्नी से मारपीट करने पर निलम्बित करना पड़ा है. इसी तरह शैलेन्द्र वास्तव जो 5 सालों तक परिवहन आयुक्त रहे थे उनकी 120 से ज्यादा सम्पत्तियों पर आयकर विभाग ने जांचें शुरू कर दी हैं.

शैलेन्द्र वास्तव के पास 2 हजार करोड़ की सम्पत्तियां होने की खबरें प्रशासनिक सूत्र बता रहे हैं. मध्य प्रदेश भर में 20 साल पहले तक बड़े नामी व अफसरान रहे थे. एम.एन. बुच, जी.एन. बुच से लेकर सुधीरनाथ, अजयनाथ, दिलीप कामदेव व भागीरथ प्रसाद का नाम काफी इज्जत से लिया जाता रहा है. पन्नालाल से लेकर रामलाल वर्मा भी पुलिस (Police) अधीक्षक के तौर पर लोकप्रिय रहे थे. इन्दौर, ग्वालियर आदि में अब ऐसे अफसर देखने को भी नहीं हैं. प्रदेश में अच्छे अफसरानों को सियासतदां पसन्द नहीं करते हैं. ये आम तौर से देखा जा रहा है. प्रकाशचन्द्र सेठी, अर्जुन सिंह के दौर में ईमानदार अफसरों को काफी तरजीह दी जाती रही है.

दतिया में कलेक्टर (Collector) रहे अशोक शिवहरे जो महज मिट्टी का तेल आम जनता को न मिल पाने पर हटा दिये गये थे. जबकि मिट्टी के तेल की लगभग सभी एजेन्सी सत्ता दल के नेताओं और दलालों के पास रहती आ रही हैं फिर भी व्ही.के. पवार, आर.के. गुप्ता आदि आय.पी.एस. वालों पर उंगलियां उठती रही हैं. इन्दौर के 10 थाना प्रभारियों ने सुन्दरलाल पटवा मुख्यमंत्री (Chief Minister) के शासन 90 के दौरान अपने पुलिस (Police) महानिदेशक मालवी साहब तक को हटवा दिया था. जबकि मालवी ईमानदार व न्यायप्रिय अफसरों में शुमार रहे थे. ग्वालियर चम्बल में एच.एम. जोशी, जे.एम. कुरेशी, एम.डी. शर्मा, ए. साइऔ मनोहर, ए.एन. पाठक व ओ.पी. राठौर साहब जैसे लोकप्रिय आई.जी., डी.आय.जी. व पुलिस (Police) अधीक्षक साहेबान भी रहे हैं जिन्होंने सामाजिक न्याय के पक्ष को मजबूत किया था.

अपनी कुर्सी चले जाने की परवाह नहीं की कभी. आय.ए.एस. में शिवराज सिंह, राकेश वास्तव, पी.नरहरि ने भी अपनी कुर्सी के लिए समझौता नहीं किया. नरहरि साहब ने कला संस्कृति, पुरातत्व को बढ़ावा भी दिया. राजीव टंडन, संजय राणा भी लोकप्रिय पुलिस (Police) अफसर के तौर पर लोकप्रिय हैं. राणा ने भिण्ड एस.पी. के तौर पर निष्पक्ष चुनाव कराने का सफलतापूर्वक अभियान चलाया था. अर्जुन सिंह के दौर में उन्हें भिण्ड में पदस्थ किया गया था. यहां के ठाकुर लोग दलितों को वोट डालने से रोकते आ रहे थे.