Monday , 10 May 2021

सालभर में नही पूरा हो पाया सीएए का अहम एजेंडा

नई दिल्ली (New Delhi) . सीएए विरोधी आंदोलन कोविड जैसी वजहों से नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship amendment law) सीएए एनपीआर,एनआरसी का एजेंडा इस साल परवान नहीं चढ़ पाया. सीएए सरकार का बहुत ही महत्वपूर्ण एजेंडा है, सरकार नए साल में इसे जरूर आगे बढ़ाना चाहेगी. लेकिन एक के बाद एक झंझावात के चलते सरकार कोई समय निश्चित करने की स्थिति में नहीं नजर आ रही है.

सूत्रों का कहना है कि सीएए के नियम बनने में हुई देरी अनायास नहीं है. पहले आंदोलन की वजह से इसमे विलंब हुआ. कोविड की वजह से सीएए विरोधी आंदोलन खत्म हुआ, लेकिन इस महामारी (Epidemic) ने भी सरकार की अहम रणनीति को पीछे कर दिया. कोविड की वजह से सरकार को एनपीआर जैसे महत्वपूर्ण काम भी रोकने पड़े. एनआरसी को लेकर सरकार ने पहले ही कह दिया था कि इसे एनपीआर से जोड़ना ठीक नही है. पूरे देश में एनआरसी लागू करने को लेकर उपजे भ्रम और एनपीआर को लेकर फैलाई गई अफवाहों का प्रति भी सरकार ने स्थिति स्पष्ट की थी. सूत्रों ने कहा नए वर्ष में सीएए लागू करने की कोशिश जरूर होगी लेकिन यह कई तरह की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा.

सूत्रों का कहना है कि सरकार को सीएए के नियम अधिसूचित करने से पहले कई तरह की तैयारियां करनी होंगी. जिससे विरोधी ताकते फिर से सिर न उठा पाएं. खासतौर पर गैर भाजपा शासित राज्यो में सीएए लागू करना बड़ी चुनौती है. भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा ने जल्द सीएए लागू करने का एलान किया था. लेकिन बंगाल सरकार ने इसका पुरजोर विरोध किया है. माना जा रहा है कि बंगाल चुनाव में भी ये मुद्दा बनेगा. सीएए विरोधी आंदोलन के दौरान कई गैर भाजपा शासित राज्य सरकारों ने इस कानून के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया था. ये आशंका जताई जा रही है कि जब भी कानून लागू किया जाएगा एक बार फिर विरोध के सुर तेज हो सकते हैं. पिछले दिनों गृहमंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया था कि कोविड की वजह से सीएए के नियम बनाने में देरी हुई. सूत्रों ने कहा फिलहाल सरकार की प्राथमिकता कोविड नियंत्रण है. कोविड टीकाकरण को लेकर देश भर में तैयारी चल रही है. सरकार सीएए को लेकर कोई भी कवायद शायद ये प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही करेगी. 

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