Wednesday , 22 January 2020
आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल ने खुद के क्रेडिट फण्ड में 334 करोड़ का किया निवेश

आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल ने खुद के क्रेडिट फण्ड में 334 करोड़ का किया निवेश

देश की अग्रणी म्यूचुअल फंड कम्पनी आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल असेट मैनेजमेंट कम्पनी ने अपने क्रेडिट रिस्क फण्ड में 334 करोड़ रुपए का निवेश किया है. कम्पनी ने अपने नेटवर्थ में से 256 करोड़ रुपए दिसम्बर में और 78 करोड़ रुपए अक्टूबर महीने में निवेश किए. इसका कुल नेटवर्थ सितम्बर 2019 तक 1,262 करोड़ रुपये रहा है. वैल्यू रिसर्च ने आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल के क्रेडिट रिस्क फण्ड को दिसम्बर में 5 स्टार की रेटिंग दी थी.

आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल के क्रेडिट रिस्क फण्ड को दिसम्बर में 5 स्टार की रेटिंग दी थी

आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फण्ड के एमडी एवं सीईओ निमेश शाह निवेशकों को यह सलाह देते हैं कि वे असेट अलोकेशन कटेगरी का पालन करें जो उनके जोखिम पर आधारित हो और इसमें डेट और क्रेडिट रिस्क फण्ड हों. वैल्यू रिसर्च ने आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल के क्रेडिट रिस्क फण्ड को दिसम्बर में 5 स्टार की रेटिंग दी थी.

इसके प्रतिस्पर्धी फण्डों ने औसतन 4.79 फीसदी तथा 4.83 फीसदी का रिटर्न दिया है

निमेश शाह कहते हैं कि आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल के रूप में हमने रिस्क मैनेजमेंट प्रैक्टिस और निवेश प्रक्रिया में ढेर सारे मूल्यों और विश्वासों को स्थापित किया है जिसका हम उपयोग करते हैं. मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि हम वही खाते हैं जो हम खुद बनाते हैं और साथ ही साथ निवेशकों के लिए निवेश भी करते हैं. यही नीति अपनाते हुए कम्पनी ने खुद के फण्ड में निवेश किया है. एनबीएफसी में ढेर सारे संकटों और डिफॉल्ट के बावजूद आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल की एक भी स्कीम पिछले 20 सालों में डिफॉल्ट नहीं की है. अर्थलाभ डॉटकॉम के आंकड़ों के अनुसार इस फण्ड ने पिछले 6 महीनों में 10.14 फीसदी जबकि एक साल में 9.49 फीसदी का रिटर्न दिया है इसी अवधि में इसके प्रतिस्पर्धी फण्डों ने औसतन 4.79 फीसदी तथा 4.83 फीसदी का रिटर्न दिया है.

डेट स्कीम होती है जो कम रेटिंग वाले कॉर्पोरेट बांड्स में निवेश करती है

क्रेडिट रिस्क फण्ड डेट की वह कटेगरी होती है जो पोर्टफोलियो का कम से कम 65 फीसदी हिस्सा एए से कम रेटिंग वाले पेपरों में निवेश करती है. सेबी की परिभाषा के अनुसार क्रेडिट रिस्क फण्ड एक ओपेन एंडेड डेट स्कीम होती है जो कम रेटिंग वाले कॉर्पोरेट बांड्स में निवेश करती है. इसका मतलब यह कि स्कीम ज्यादा जोखिम लेकर अच्छा ब्याज दे सकती है. कम रेटिंग वाले पेपर इसलिए ज्यादा रिटर्न देते हैं क्योंकि उनकी रेटिंग बढ़ती भी है. हालांकि यह भी जोखिम होता है कि वे पेपर डाउनग्रेड या डिफॉल्ट भी हो जाएं, जैसा कि हाल में देखा गया है.