कांग्रेस जिला स्तर के आधे अधूरे संगठन से उपचुनाव कैसे जीतेगी


जयपुर (jaipur) . बीते साल अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) सरकार पर आये सियासी संकट के बीच कांग्रेस के 39 जिलों, 400 ब्लॉक लेवल पर संगठनों को भंग कर दिया गया था अब चूंकि प्रदेश में उपचुनाव की तारीख घोषित हो गई और आज भी यह संगठन पद खाली पडे है ऐसे में उपचुनाव जीतने की कांग्रेस की रणनीति कैसे पूरी होगी हालांकि कांग्रेस जीत का दावा कर रही है.

दरअसल सचिन पायलट कैंप और अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) कैंप के बीच बीते साल जुलाई माह में हुए सियासी घमासान के बाद कांग्रेस आलाकमान ने प्रदेश कार्यकारिणी, जिला कार्यकारिणी, ब्लॉक, अग्रिम संगठनों और विभाग- प्रकोष्ठों की कार्यकारिणी भंग कर दी थी जिसके बाद इनके नए सिरे से गठन की कवायद शुरू हुई थी लेकिन बीते 9 माह में केवल प्रदेश कांग्रेस और महिला कांग्रेस की कार्यकारिणी के सामने आई है जबकि 39 जिलों और 400 ब्लॉक में कांग्रेस की कार्यकारिणी भंग पड़ी है और तमाम कामकाज ठप पड़ा है. हालांकि प्रदेश प्रभारी अजय माकन ने जिला प्रभारियों को जिला अध्यक्षों और ब्लॉक लेवल पर संगठन को खड़ा करने की जिम्मेदारी दी थी लेकिन जिला प्रभारी भी संगठन को खड़ा करने में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं. यही वजह है कि अब 3 सीटों पर होने जा रहे उपचुनाव में भी प्रदेश कांग्रेस को जिला स्तरीय संगठन की कमी खल रही है.

कांग्रेस हलकों में चर्चा इस बात की है कि कि बिना संगठन के किस प्रकार से उपचुनाव लड़ा जाएगा क्योंकि पार्टी के लिए वोट मानने के लिए घर घर जाने और प्रचार का जिम्मा स्थानीय संगठन के हाथों में होता है. बिना संगठन की जिम्मेदारी मिले कांग्रेस कार्यकर्ता घर-घर जाकर वोट मांगने के लिए तैयार नहीं है. वहीं बीते साल प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव, ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के हुए चुनाव भी बिना संगठन के लड़े गए थे, जहां कांग्रेस प्रत्याशियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था. संगठन के अभाव में चुनाव के लिए न खास रणनीति बन पाई और न ही चुनावी माहौल देखने को मिला. ऐसे में अब यही चिंता प्रदेश कांग्रेस को भी सताए जा रही है कि आखिर संगठन के बिना उपचुनाव में कैसे जाया जाए. हालांकि कांग्रेस नेताओं का दावा है कि स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव की तरह ही उपचुनावों में भी कांग्रेस बिना संगठन के जीत हासिल करेगी.

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