अमेरिका के रेसिप्रोकल टैरिफ से डायमंड और टेक्सटाइल कारोबार पर कितना असर, व्यापारियों ने दिया जवाब

सूरत, 3 अप्रैल . अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया भर के देशों के लिए रेसिप्रोकल टैरिफ की घोषणा कर दी है. भारतीय वस्तुओं पर 27 प्रतिशत टैरिफ लागू होने से गुजरात के सूरत शहर के दो बड़े कारोबार, डायमंड और टेक्सटाइल, पर इसका बड़ा असर देखने को मिलेगा.

जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के पूर्व रीजनल चेयरमैन और इंडियन डायमंड इंस्टीट्यूट (सूरत) के प्रमुख दिनेश नावड़िया ने को बताया कि भारत के जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर का निर्यात वर्तमान में 10 बिलियन डॉलर का है और भविष्य में इसके 12 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है. लेकिन, नए टैरिफ की वजह से स्थिति कुछ बदल गई है.

नावड़िया ने बताया कि डायमंड ज्वेलरी पर 5 प्रतिशत से 7 प्रतिशत लगने वाला टैरिफ अब 31 प्रतिशत से 33 प्रतिशत हो जाएगा. सीवीडी डायमंड पर जहां 0 प्रतिशत टैरिफ लगता था, अब 27 प्रतिशत टैरिफ लागू होगा. सिल्वर और जेम्स स्टोन पर 5 प्रतिशत टैरिफ था, अब 31-32 प्रतिशत लगेगा.

नावड़िया ने कहा कि जेम्स एंड ज्वेलरी में अमेरिका का 89 बिलियन डॉलर का मार्केट है. कट एंड पॉलिश्ड में भारत से 70 प्रतिशत निर्यात होता है, जिसमें 35 प्रतिशत निर्यात अमेरिका में किया जाता है. अमेरिका द्वारा थाईलैंड पर 36 प्रतिशत और चीन पर 34 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है. वहीं, थाईलैंड और चीन से भी कट एंड पॉलिश्ड और ज्वेलरी एक्सपोर्ट होती है. ऐसे में थाईलैंड और चीन की तुलना में भारत पर कम टैरिफ लगने से हमें थोड़ा फायदा मिलेगा.

उन्होंने कहा कि इजरायल पर जीरो टैरिफ और यूएई पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है. इससे जो बड़े कारोबारी हैं, वे वहां से एक फायदा ले सकते हैं.

नावड़िया ने कहा कि सोना (गोल्ड) कभी 45 हजार पर था और आज 90 हजार पहुंच गया है, बावजूद इसके पीली धातु को लेकर मांग पहले जैसी ही बनी हुई है. शुरुआत में भाव बढ़ने से खरीदारी में कमी आती है, लेकिन बाद में खरीदारी भी बढ़ने लगती है.

उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि अमेरिकन लोगों की सोच भी ऐसी ही रहेगी. फिलहाल थोड़ी तकलीफ होगी, लेकिन बाद में फिर से नए टैरिफ के साथ मार्केट उठेगा, यानी यह लंबे समय तक का नुकसान नहीं होगा, ऐसी उम्मीद की जा सकती है.

वहीं, सूरत कपड़ा कारोबार की बात करें तो व्यापारी मानते हैं कि टैरिफ लगने से कपड़ा उद्योग पर 1 प्रतिशत से 2 प्रतिशत का ही फर्क पड़ेगा. प्रतिभा ग्रुप के चेयरमैन प्रमोद चौधरी की मानें तो सूरत टेक्सटाइल कारोबार ज्यादातर घरेलू बाजार पर आधारित है.

उन्होंने से कहा, “निर्यात में केवल 1 या 2 प्रतिशत का योगदान होता है. ऐसे में सूरत टेक्सटाइल कारोबार पर फिलहाल अभी कोई बड़ा असर दिखाई नहीं देता है.”

उनका मानना है कि कपड़ा बनाने वाले देशों में भारत, बांग्लादेश, वियतनाम, पाकिस्तान और टर्की हैं, जिन पर टैरिफ लगा है. ऐसे में किसी भी तरह का प्रभाव केवल भारत के लिए सीमित नहीं होगा. अमेरिका को भी कपड़ों की जरूरत है और वहां गारमेंट नहीं बनाए जाते. ऐसे में इस तरह के टैरिफ से अमेरिका पर बोझ बढ़ेगा.

एसकेटी/एबीएम