लखीमपुर में 4 किसानों की मौत के बाद भी कैसे बवाल थाम पाई योगी सरकार – Daily Kiran
Sunday , 28 November 2021

लखीमपुर में 4 किसानों की मौत के बाद भी कैसे बवाल थाम पाई योगी सरकार

लखनऊ (Lucknow) . उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के लखीमपुर खीरी कांड में चार किसानों की मौत के बाद बढ़े बवाल को कंट्रोल करने में किसान नेता राकेश टिकैत ने योगी सरकार के लिए संकटमोचक की तरह भूमिका निभाई. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) सरकार ने लखीमपुर खीरी कांड के दूरगामी और बुरे परिणाम को रोकने के लिए तेजी से कार्रवाई की और इसमें राकेश टिकैत ने एक तरह से कानून- व्यवस्था कायम रखने में सरकार की बड़ी मदद की. राकेश टिकैत की मदद से ही 24 घंटे के भीतर जमा हुए करीब 25,000 से अधिक किसानों की भीड़ को हटाया गया. किसानों के मौत के बाद उनके गुस्से को शांत रखने में राकेश टिकैत के अलावा, वरिष्ठ अधिकारियों का एक समूह भी था, जिनके पास वर्षों से पश्चिमी यूपी के नेता के साथ काम करने का अनुभव था. अधिकारियों ने अन्य लोगों के साथ मध्यस्थता के लिए राकेश टिकैत से संपर्क किया और यह सुनिश्चित किया कि वह जल्द से जल्द लखीमपुर खीरी पहुंचे. इसके बाद राकेश टिकैत को पुलिस (Police) की टीम लखीमपुर ले आई और बातचीत की व्यवस्था की, जो सोमवार (Monday) को लगभग 1.30 बजे शुरू हुई और करीब 12 घंटे बाद मंगलवार (Tuesday) को दोपहर लगभग 2 बजे समाप्त हुई. अखबार ने दावा किया है कि राकेश टिकैत ने लखनऊ (Lucknow) से अपने साथ समन्वय कर रहे अधिकारी से विपक्षी नेताओं को दूर रखने के लिए कहा था, क्योंकि इससे किसानों को समझाने और माहौल शांत करने में मुश्किल हो सकती थी. इस बीच योगी आदित्यनाथ सरकार ने सड़कों को अवरुद्ध कर दिया, विमानों की लैंडिंग रोक दी और नेताओं को हिरासत में ले लिया, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि विपक्ष मंगलवार (Tuesday) को भी घटनास्थल पर नहीं पहुंच सके. लखीमपुर खीरी कांड में राकेश टिकैत द्वारा निभाई गई भूमिका महत्वपूर्ण है, क्योंकि उन्हें यूपी में कृषि विरोध का चेहरा माना जाता है. मौके पर मौजूद एक अधिकारी ने कहा कि राकेश टिकैत ने कभी भी अपनी बातचीत में या किसानों को संबोधित करते हुए राज्य सरकार (State government) के प्रति कोई आक्रामकता नहीं अपनाई या आलोचना नहीं की. प्रदर्शनकारियों (Protesters) के तितर-बितर होने के बाद ही वह लखीमपुर खीरी से निकले. अधिकारियों ने स्वीकार किया कि उस वक्त काफी तनावपूर्ण माहौल था, क्योंकि भीड़ घटनास्थल के आसपास बढ़ती जा रही थी. उन्हें डर था कि किसी भी छोटी सी घटना से गुस्साए किसानों- कई कथित तौर पर तलवारों, लाठियों और लाइसेंसी बंदूकों से लैस- और मौके पर तैनात पुलिस (Police), आरएएफ और एसएसबी के विशाल दल के बीच झड़प हो सकती है.

इसके बाद दोपहर करीब 1 बजे अपर मुख्य सचिव कृषि देवेश चतुर्वेदी, एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार और एडीजी लखनऊ (Lucknow) जोन एसएन सबत आशीष के खिलाफ एफआईआर (First Information Report) की कॉपी लेकर किसानों से बात करने पहुंचे. इस बैठक में मृतक किसानों के परिजन भी मौजूद थे. मृतकों के परिवारों के लिए मुआवजे की राशि 45 लाख रुपये और घायलों के लिए 10 लाख रुपये तय की गई थी. लखनऊ (Lucknow) में शीर्ष अधिकारियों ने टिकैत और पंजाब (Punjab) के एक सिख किसान नेता से भी बात की. कथित तौर पर वरिष्ठ अधिकारियों की टीम फाइलन बातचीत पर मीडिया (Media) से बातचीत नहीं करना चाहती थी, मगर राकेश टिकैत मीडिया (Media) से बातचीत चाहते थे. उन्होंने मीडिया (Media) को बताया कि रविवार (Sunday) की घटना को लेकर किसान अपना आंदोलन समाप्त कर रहे हैं और किसानों को संबोधित करने चले गए. सूत्रों की मानें तो चतुर्वेदी और अंतिम वार्ता में शामिल अन्य अधिकारियों के अलावा अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) अवनीश कुमार अवस्थी ने भी अहम भूमिका निभाई. सूत्रों ने बताया कि अवस्थी मौके पर मौजूद अधिकारियों और टिकैत के लगातार संपर्क में थे.

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