ममता बनर्जी की नाक और साख का सवाल कैसे बन गया भवानीपुर उपचुनाव – Daily Kiran
Thursday , 9 December 2021

ममता बनर्जी की नाक और साख का सवाल कैसे बन गया भवानीपुर उपचुनाव

कोलकाता (Kolkata) . पश्चिम बंगाल (West Bengal) की राजधानी कोलकाता (Kolkata) में भवानीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के लिए नाक और साख का सवाल बन गया है. इस सीट पर मुख्यमंत्री (Chief Minister) और पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी मैदान में हैं. ममता बनर्जी के मुकाबले बीजेपी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में एडवोकेट प्रियंका टिबरेवाल को मैदान में उतारा है. यहां टीएमसी ममता की जीत को लेकर चिंतित नहीं है. उसकी चिंता जीत के अंतर को बढ़ाना है. ममता के भतीजे सांसद (Member of parliament) अभिषेक बनर्जी कहते हैं, ‘हम कम से कम एक लाख वोटों के अंतर से जीत सुनिश्चित करना चाहते हैं.’ मंगलवार (Tuesday) से ही बंगाल की खाड़ी पर बने निम्न दबाव की वजह से कोलकाता (Kolkata) और आसपास के इलाकों में लगातार भारी बारिश हो रही है. इससे महानगर के कई इलाकों में पानी भर गया है. इस बारिश ने टीएमसी की चिंता बढ़ा दी है. मौसम खराब होने की स्थिति में लोगों को घरों से निकाल कर मतदान केंद्रों तक पहुंचाना ही पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है. इस विधानसभा क्षेत्र में मतदान का प्रतिशत करीब 50 फीसदी ही रहता है. राज्य में विधानसभा की सात सीटें खाली हैं. लेकिन 30 सितंबर को इनमें से तीन सीटों पर ही मतदान होगा. बाकी चार सीटों पर 30 अक्तूबर को मतदान होना है. भवानीपुर ममता बनर्जी की पारंपरिक सीट रही है. वह वर्ष 2011 और 2016 के विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) में यहां से जीती थीं. लेकिन बीजेपी की चुनौती स्वीकार करते हुए उन्होंने इस साल अप्रैल-मई में हुए चुनाव के दौरान पूर्व मेदिनीपुर के नंदीग्राम से मैदान में उतरी थीं. वहां मतदान और मतगणना पर उभरे विवादों के बीच कभी बेहद करीबी रहे बीजेपी उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी ने ममता को दो हजार से भी कम वोटों के अंतर से पराजित कर दिया था. बीते विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) में भवानीपुर सीट से टीएमसी उम्मीदवार शोभनदेव चटर्जी मैदान में थे और उन्होंने करीब 29 हजार वोटों के अंतर से यहां जीत हासिल की थी. लेकिन ममता की हार के बाद शोभनदेव ने इस्तीफा देकर मुख्यमंत्री (Chief Minister) के लिए यह सीट खाली कर दी थी. भवानीपुर के साथ ही मुर्शिदाबाद जिले की जंगीपुर और शमशेरगंज सीटों पर भी कल ही मतदान होगा. वहां अप्रैल-मई में हुए चुनाव के दौरान दो उम्मीदवारों के निधन की वजह से चुनाव स्थगित कर दिया गया था. भवानीपुर के समीकरण इस सीट पर जो 12 उम्मीदवार मैदान में हैं उनमें पांच महिलाएं हैं. कांग्रेस ने भवानीपुर सीट पर कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है जबकि सीपीएम ने श्रीजीव विश्वास को अपना उम्मीदवार बनाया है. इस साल अप्रैल में हुए विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) में कांग्रेस इस सीट पर तीसरे नंबर पर रही थी. ममता बनर्जी ने वर्ष 2016 के विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) में इस सीट पर कांग्रेस-वाम गठजोड़ की उम्मीदवार दीपा दासमुंशी को करीब 25 हजार वोटों के अंतर से हराया था. दक्षिण कोलकाता (Kolkata) की इस विधानसभा सीट के जातीय समीकरण दिलचस्प हैं. इलाके के करीब 40 फीसदी वोटर गैर बंगाली हैं. इनमें गुजरात (Gujarat)ी, मारवाड़ी, सिख और बिहारी तबके की तादाद सबसे ज्यादा हैं. इसके अलावा 20 फीसदी आबादी मुसलमानों की है जबकि बाकी 40 फीसदी बंगाली हैं. इसी वजह से इस इलाके को ‘मिनी इंडिया’ भी कहा जाता है. गुजरात (Gujarat)ी और मारवाड़ी तबके के लोगों को पारंपरिक तौर पर बीजेपी का समर्थक माना जाता है. शायद इसी वजह से बीजेपी ने यहां एक हिंदीभाषी प्रियंका टिबरेवाल को मैदान में उतारा है. केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, स्मृति ईरानी और सांसद (Member of parliament) मनोज तिवारी जैसे लोग यहां पार्टी का प्रचार कर चुके हैं. इलाके के जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए यहां बीजेपी की जमीन मजबूत नजर आती है. लेकिन सीट का चुनावी इतिहास टीएमसी के पक्ष में है. बीते एक दशक में होने वाले छह चुनावों में से पार्टी महज एक बार यहां पराजित हुई है. वर्ष 2019 के लोकसभा (Lok Sabha) चुनाव के दौरान इस विधानसभा सीट पर बीजेपी को उसके मुकाबले बढ़त मिली थी.

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