पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीदों पर फिर सकता है पानी – Daily Kiran
Thursday , 28 October 2021

पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीदों पर फिर सकता है पानी

नई दिल्ली (New Delhi) . केरल (Kerala) ने कहा है कि वह पेट्रोल (Petrol) और डीजल को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाने के किसी भी कदम का पुरजोर विरोध करेगा, क्योंकि इससे राज्य के राजस्व संग्रह पर प्रतिकूल असर पड़ेगा. राज्य ने कहा कि इसके बजाए केंद्र को आम लोगों को राहत देने के लिये ईंधन पर केंद्रीय करों को कम करना चाहिए. इस बीच आज पेट्रोलियम कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के दाम में लगातार 12वें दिन भी कोई बदलाव नहीं किया है. दिल्ली में आज इंडियन ऑयल के पंप पर पेट्रोल (Petrol) 101.19 रुपये प्रति लीटर औैर डीजल 88.62 रुपये प्रति लीटर पर रहा. बता दें सरकार पेट्रोल, डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार कर रही है. अगर ऐसा हुआ तो देश भर में पेट्रोल (Petrol) के भाव 75 रुपये और डीजल के भाव 68 रुपये प्रति लीटर तक आ सकता है. पेट्रोल (Petrol) और डीजल के खुदरा बिक्री मूल्य में केंद्रीय उत्पाद शुल्क और वैट (मूल्य वर्धित कर) आधे के करीब योगदान है. ईंधन को जीएसटी के दायरे में लाने से राज्यों के राजस्व संग्रह पर असर पड़ेगा.

अगर पेट्रोल (Petrol) और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने को लेकर कोई कदम उठाया जाता है, राज्य उसका पुरजोर विरोध करेगा. उन्होंने कहा कि ईंधन के दाम में तेजी का कारण केंद्र की तरफ से उपकर में वृद्धि है. अगर केंद्र इस उपकर को कम कर दे, इससे पेट्रोल (Petrol) और डीजल के दाम नीचे लाने में मदद मिलेगी. बालागोपाल ने कहा कि अगर पेट्रोल (Petrol) और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाता है, राज्य को सालाना 8,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा. जीएसटी परिषद की आज लखनऊ (Lucknow) में बैठक होने वाली है. महाराष्ट्र (Maharashtra) के वित्त मंत्रालय की भी जिम्मेदारी संभाल रहे पवार ने संवाददाताओं से कहा कि केंद्र कर लगाने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन जो राज्य के अधिकार क्षेत्र में है, उसमें अतिक्रमण नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा, ”अगर ऐसा करने का कोई कदम होता है, तो राज्य सरकार (State government) जीएसटी परिषद की शुक्रवार (Friday) को होने वाली बैठक में अपना विचार रखेगी. पवार ने कहा कि केंद्र सरकार (Central Government)को ‘एक राष्ट्र एक कर के लिए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) कानून लागू करते समय संसद में किए गए सभी वादों का पालन करना चाहिए. उन्होंने कहा, ”हमें जीएसटी रिफंड के अपने हिस्से के 30,000 से 32,000 करोड़ रुपये रुपये अभी तक नहीं मिले हैं. एक्साइज और स्टांप शुल्क के अलावा, राज्य सरकार (State government) के लिए राजस्व का सबसे बड़ा स्रोत जीएसटी है. इस सप्ताह की शुरुआत में नीति आयोग के सदस्यों के साथ बातचीत के दौरान महाराष्ट्रीय सरकार ने वित्तीय मोर्चे पर राज्य की स्थिति को रखा था.

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