
शिमला, 7 अप्रैल . हिमाचल हाईकोर्ट से राज्य Government को तगड़ा झटका लगा है. मामला अदालतों के बुनियादी ढांचे से जुड़ा है जिस पर हाईकोर्ट के अनुरोध को नजरअंदाज करना Government को महंगा पड़ा. हाईकोर्ट ने राज्य Government पर 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है.
दरअसल, हिमाचल हाईकोर्ट कई बार राज्य Government को निर्देश दे चुका था कि न्यायपालिका के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारा जाए, नए कोर्ट बनाए जाएं और जरूरी पदों को भरा जाए. बार-बार कहने के बावजूद राज्य Government की तरफ से ठोस कदम नहीं उठाए गए.
इसी पर नाराजगी जताते हुए मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया की अगुवाई वाली खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाया. कोर्ट ने साफ कहा कि Government सिर्फ आश्वासन दे रही है लेकिन जमीन पर कोई काम होता नजर नहीं आ रहा. सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि अलग-अलग अधिकारी जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे काम और ज्यादा लटक रहा है.
कोर्ट ने Government के उस हलफनामे को भी ध्यान से देखा, जिसमें कहा गया था कि कुछ प्रस्ताव कैबिनेट के सामने रखे जाएंगे. कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब कैबिनेट की बैठकें नियमित होती हैं, तो फिर इतने समय में कोई फैसला क्यों नहीं लिया गया. करीब तीन महीने बीत जाने के बावजूद कोई ठोस प्रगति नहीं हुई जिसे कोर्ट ने गंभीरता से लिया.
कोर्ट ने कुछ खास जगहों पर जजों और अदालतों की जरूरत बताई थी. इस पर काम करने के बजाय Government कहीं और कोर्ट बनाने की बात कर रही थी, जिसकी मांग ही नहीं की गई थी. इस पर भी कोर्ट ने हैरानी जताई और कहा कि Government आखिर किस आधार पर फैसले ले रही है.
इसके अलावा, एनडीपीएस मामलों (नशे से जुड़े केस) की बढ़ती संख्या पर भी कोर्ट ने चिंता जताई. कोर्ट ने कहा कि केंद्र Government भी बार-बार स्पेशल कोर्ट बनाने की बात कह चुकी है लेकिन राज्य Government ने इस दिशा में भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया. सिर्फ हिमाचल को ड्रग-फ्री बनाने के दावे किए जा रहे हैं जबकि असल में जरूरी ढांचा ही तैयार नहीं किया जा रहा.
कोर्ट ने कहा कि बढ़ती आबादी और मामलों के हिसाब से इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाना जरूरी है. 20 साल पुराने सिस्टम से आज की जरूरतों को पूरा नहीं किया जा सकता. ऐसे में Government का यह रवैया संविधान के तहत उसकी जिम्मेदारी से बचने जैसा है.
इन सब बातों को देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य Government पर 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है और कहा है कि यह राशि कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कराई जाए. साथ ही, वित्त विभाग के प्रधान सचिव को निर्देश दिया गया है कि वे अगले साल के बजट में न्यायपालिका के लिए कितनी राशि रखी जा रही है, इसकी पूरी जानकारी दें और यह भी बताएं कि पिछले साल के मुकाबले इसमें बढ़ोतरी हुई है या नहीं.
हाईकोर्ट ने साफ चेतावनी दी कि अगर अगली सुनवाई तक Government ने ठोस और सक्रिय कदम नहीं उठाए, तो और भी सख्त आदेश दिए जा सकते हैं. अब इस मामले की अगली सुनवाई 4 मई को होगी.
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पीआईएम/पीएम