Thursday , 3 December 2020

व्यर्थ की जनहित याचिकाओं के जरिये खराब ना करे समय, हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका को खारिज करते हुए की यह टिप्पणी


भोपाल (Bhopal) . कोर्ट का समय बेहद कीमती है. व्यर्थ की जनहित याचिकाओं के जरिये उसे खराब न किया जाए. फिलहाल, यह जनहित याचिका खारिज की जाती है. भविष्य में जनहित याचिकाकर्ता ऐसी गलती न दोहराए. अन्यथा जुर्माना लगाया जाएगा. यह तल्ख टिप्पणी मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक जनहित याचिका को खारिज करते हुए की. इससे पूर्व कोर्ट ने टिप्पणी में साफ किया कि भले ही 10.50 किलोमीटर सड़क का 400 मीटर हिस्सा निर्मित न हुआ हो, लेकिन स्टेट हाइवे से गांव में दाखिल होने के दो वैकल्पिक मार्ग मौजूद हैं.

इस दौरान जनहित याचिकाकर्ता सागर निवासी अनुराग सिंह ठाकुर की ओर से अधिवक्ता श्याम यादव ने पक्ष रखा. उन्होंने दलील दी कि सागर जिला अंतर्गत ढाना-हिलगन सड़क 10.50 किलोमीटर निर्माण के लिए 2012 में स्वीकृत हुई थी. इसमें से 10.01 किलोमीटर सड़क निर्मित कर दी गई. लेकिन 400 मीटर सड़क अब तक नहीं बनाई गई. इस वजह से मूल उद्देश्य पूरा नहीं हुआ है. कई बार इस दिशा में ध्यान आकर्षित किए जाने के बावजूद कोई कार्रवाई न होने के कारण व्यापक जनहित में हाई कोर्ट आना पड़ा. राज्य की ओर से उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने जनहित याचिका का विरोध किया.

उन्होंने साफ किया कि जिस गांव से संबंधित मुद्दा उठाया गया है, उस तक पहुंचने के लिए पहले से ही स्टेट हाइवे के दो वैकल्पिक मार्ग मौजूद हैं. ऐसे में महज 400 मीटर सड़क अधूरी होने का रोना ठीक नहीं. दरअसल, जो हिस्सा अधूरा है, वह निजी जमीनों का अधिग्रहण न हो पाने से संबंधित है. जनहित याचिकाकर्ता यही मुद्दा लेकर 2016 में भी हाई कोर्ट आया था, तब भी जनहित याचिका खारिज हो गई थी. लिहाजा, वर्तमान जनहित याचिका भी खारिज किए जाने योग्य है. हाई कोर्ट ने जानकारी को रिकॉर्ड पर लेकर जनहित याचिका खारिज कर दी. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (judge) संजय यादव व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई.