दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए कृत्रिम वर्षा का ट्रायल शुरू करेगी सरकार

नई दिल्ली, 3 अप्रैल . दिल्ली सरकार में पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए एक महत्वपूर्ण कदम के बारे में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि सरकार दिल्ली में कृत्रिम बारिश का ट्रायल करेगी.

मनजिंदर सिंह सिरसा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली सरकार ने एक नई पहल की है, जिसके तहत दिल्ली में कृत्रिम वर्षा का प्रयोग किया जाएगा. यह एक ट्रायल बेसिस पर किया जाएगा, और यदि यह सफल रहता है, तो इसे भविष्य में और व्यापक रूप से लागू किया जा सकता है. उनका मानना है कि यह कदम दिल्ली में प्रदूषण की गंभीर स्थितियों को कम करने में मदद करेगा.

सिरसा ने कहा, “हमारा उद्देश्य यह है कि हम प्रदूषण की अत्यधिक स्थितियों में इस तकनीक का उपयोग कर सकें. हम चाहते हैं कि इस ट्रायल के दौरान बारिश के पानी का परीक्षण किया जाए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उसमें कोई हानिकारक रसायन या खतरनाक तत्व न हों, जो जनता के लिए खतरे का कारण बन सकते हैं.”

उन्होंने कहा कि यह कदम दिल्ली के बाहरी इलाकों में शुरू किया जाएगा, जहां कम से कम यह प्रदूषण को नियंत्रित करने के प्रयास में सहायक हो सकता है. इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि जहां पर क्लाउड सीडिंग की जाए, वहां के वातावरण की स्थिति उपयुक्त हो, जिसमें आर्द्रता और बादलों की न्यूनतम मात्रा का होना आवश्यक है.

सिरसा ने कहा कि दिल्ली सरकार ने यह निर्णय लिया है कि मई में जब दिल्ली में गर्मी और प्रदूषण दोनों का असर अधिक होता है, तब इस कृत्रिम वर्षा का प्रयोग शुरू किया जाएगा. इसके लिए दिल्ली सरकार नागर विमानन महानिदेशालय और आईआईटी कानपुर के साथ मिलकर काम करेगी.

मंत्री ने कहा कि इसके लिए एक विस्तृत योजना तैयार की जा रही है, जिसमें यह तय किया जाएगा कि किन क्षेत्रों में क्लाउड सीडिंग का परीक्षण किया जाए. उन्होंने यह भी कहा कि यह परीक्षण दिल्ली के बाहरी क्षेत्रों में किया जाएगा, ताकि इसे अधिक प्रभावी और सुरक्षित रूप से लागू किया जा सके.

सिरसा ने अंत में कहा कि क्लाउड सीडिंग की प्रक्रिया बादलों की स्थिति और मौसम के मौजूदा हालातों पर भी निर्भर करेगी. उन्होंने यह विश्वास व्यक्त किया कि यदि यह परीक्षण सफल होता है, तो भविष्य में इसे और अधिक विस्तार दिया जाएगा और दिल्ली के प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए इसे एक स्थायी उपाय के रूप में लागू किया जा सकेगा.

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