
रायपुर, 23 फरवरी . माओवादियों की Odisha राज्य कमेटी के पश्चिम सब जोनल ब्यूरो सचिव विकास द्वारा उपChief Minister विजय शर्मा के लिए जारी किए गए पत्र के संबंध में एक ऑडियो संदेश जारी किया गया है. अपने संदेश में विकास द्वारा बलांगीर, बरगढ़, और महासमुंद डिवीजन के पुनर्वास के निर्णय का उपChief Minister शर्मा ने स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि कल मुझे पत्र प्राप्त हुआ है. आप सभी 15 साथी मुख्यधारा में शामिल होना चाहते हैं. आप शीघ्र निर्णय लीजिए आप 02-03 मार्च तक आना चाहते हैं, बिना किसी चिंता के आएं.
उनके द्वारा पत्र में कुछ चिंताएं व्यक्त की गईं थीं, जिनका समाधान उपChief Minister विजय शर्मा ने अपने सन्देश में किया है, जिसमें उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण शब्द के स्थान पर हम सम्मानपूर्वक पुनर्वास प्रयोग करते हैं. मुख्यधारा में आते ही घर भेजने में अभी परिस्थितियां पूर्ण ठीक नहीं हुई हैं, घर पर जान का खतरा हो सकता है और लंबे समय तक जंगल में रहने के कारण आपके विभिन्न प्रकार के दस्तावेज, बैंक खाता नहीं होता है. इन प्रक्रियाओं को भी पूर्ण करना आवश्यक है, मुख्यधारा में शामिल होने से पहले आपको विविध अजीविकामूलक कौशल सिखाने का भी एक प्रोग्राम Government द्वारा चलाया जा रहा है, जिसमें किसी को ड्राइवर तो किसी को मोबाइल रिपेयरिंग या मोबाइल ऑपरेट का कार्य सिखाया जा रहा है ताकि वे सम्मानपूर्वक आजीविका अर्जित कर सकें. कुछ लोगों को अक्षर ज्ञान की भी आवश्यकता है वह भी दिलाया जा रहा है.
उन्होंने पुनर्वास केंद्र के सम्बंध में उनके संशयों का जवाब देते हुए कहा कि पुनर्वास केंद्र के अंदर कोई बंद जेल के जैसी व्यवस्था नहीं है. यह एक खुला पुनर्वास केंद्र है, जिसमें लोग आना-जाना सब कुछ करते हैं, इस पुनर्वास केंद्र से लोग रायपुर भी घूमने आते हैं. केंद्र में सुबह से शाम तक की प्रक्रिया बनी है, जिसमें खेलकूद, स्वास्थ्य परीक्षण सभी समाहित हैं. इसमें तीन-चार महीने का वक्त दिया गया है. वह पूरा करके गांव की स्थितियां सामान्य होते ही लौट सकते हैं. उन्होंने कहा कि कोर्ट भेजने और कार्रवाई करने के प्रश्न का जवाब देते हुए कहा कि शासन द्वारा पुनर्वासित लोगों पर चल रहे मुकदमों के समाधान के लिए मंत्रियों की एक उप समिति का गठन भी किया है, जिसमें सभी प्रकरणों में से संविधान और विधि के दायरे में किन-किन प्रकरणों को वापस लिया जा सकता है इसके लिए विचार किया जा रहा है.
छत्तीसगढ़ की Government ने जंगल से पुनर्वास के साथ जेल से भी पुनर्वास का प्रयास किया जा रहा है. इसके लिए कानूनी प्रक्रिया क्या होगी, इस पर भी चिंतन जारी है. जेल से पुनर्वास का अर्थ है कि जेल से जमानत करवाकर के बाहर लाकर उन्हें पुनर्वास केंद्र में लाया जाएगा, उसके बाद उनकी सहमति से उनका पुनर्वास कराया जाएगा. बाद में उन्हें निश्चित समय के बाद अपने घर भेजा जाएगा.
उन्होंने पत्र में मीडिया के माध्यमसे स्पष्ट किया कि अनेक मामलों में Government ने अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की है. उत्तर डिवीजन के सचिव रहे सतीश अपने साथ 210 लोगों को ले करआए थे, कांकेर में 21 लोगों ने भी पुनर्वास किया, अभी केंद्रीय कमेटी सदस्य रामधेर मज्जी ने भी जब पुनर्वास किया तब भी सुरक्षा सुनिश्चित की गई थी. कोई भी चिंता ना करें चाहे उड़ीसा Police का अभियान हो या छत्तीसगढ़ का Police का अभियान हो सभी को सूचना देकर आपकी अपेक्षा के अनुरूप ही सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी.
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एमएस/