‘जवानों के करियर का रास्ता बंद कर रही सरकार’, सीएपीएफ बिल पर भड़के दीपेंद्र हुड्डा

New Delhi, 2 अप्रैल . दिल्ली में केंद्रीय सशस्त्र Police बल (सीएपीएफ) से जुड़े प्रस्तावित विधेयक को लेकर Political विवाद गहराता जा रहा है. कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने Government पर तीखा हमला बोलते हुए इस बिल को जवानों के भविष्य के खिलाफ बताया है.

कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने Thursday को मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि Government ऐसा कानून लेकर आई है, जो सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी सहित सभी सीएपीएफ बलों के कर्मियों के करियर में आगे बढ़ने के रास्ते बंद कर देता है. यह विधेयक न केवल जवानों के पदोन्नति और अवसरों को सीमित करता है, बल्कि यह कानून Supreme Court के आदेशों को भी दरकिनार करता है, जिससे सभी जवानों के भविष्य की संभावनाएं रुक गई हैं.

कांग्रेस सांसद ने इस मुद्दे पर Government की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा के दौरान देश के गृह मंत्री अमित शाह का सदन में अनुपस्थित रहना बेहद चिंताजनक है. गृह मंत्री को इस संवेदनशील मुद्दे पर सदन में उपस्थित रहकर जवाब देना चाहिए था, लेकिन उन्होंने एक बार भी आकर इस पर बात करना जरूरी नहीं समझा.

उन्होंने आगे कहा कि 31 मार्च को अमित शाह ने देश में नक्सलवाद के सफाए का ऐलान किया था, लेकिन अब उसी Government ने उन सीएपीएफ जवानों और अधिकारियों के भविष्य की संभावनाओं पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं, जो नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में अहम भूमिका निभाते हैं. उन्होंने यह स्पष्ट किया कि इसी विरोध के चलते कांग्रेस ने सदन से वॉकआउट किया.

बता दें कि राज्यसभा में Wednesday को ध्वनि मत से केंद्रीय सशस्त्र Police बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया गया. इस दौरान विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया. विपक्ष चाहता था कि विधेयक को आगे विचार-विमर्श के लिए चयन समिति को भेजा जाए. इससे पहले सदन में विधेयक पर हुई चर्चा व विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि यह विधेयक संघीय ढांचे और संविधान की भावना के विरुद्ध नहीं है. यह संघीय ढांचे को और मजबूत करता है. केंद्रीय सशस्त्र Police बल राज्यों में Police और प्रशासन के साथ समन्वय में कार्य करते हैं.

पीएसके

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