Sunday , 6 December 2020

बजट की तंगी से गो माता को नहीं मिल रहा इलाज, कोरोना संक्रमण की वजह से गड़बडाई व्यवस्था


भोपाल (Bhopal) . मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) सरकार के पास बजट की तंगी की वजह से गो माता को सही तरीके से इलाज नहीं ‎मिल पा रहा है. प्रदेश में जारी कोरोना (Corona virus) के संक्रमण के कारण पूरी व्यवस्था गडबडा गई है. किसानों के पालतु पशुओं को करीब दो महीने से पशुधन संजीवनी हेल्प लाइन से इलाज नहीं मिल रहा है. यह स्थिति तब है,जब प्रदेश में सरकार गो-कैबिनेट गठित कर चुकी है और गोवंश को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा रहे हैं.

विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) से पहले वर्ष 2018 में शिवराज सरकार ने पशुधन संजीवनी हेल्पलाइन-1962 शुरू की थी. इसके मदद से किसानों के पालतु पशुओं को घर बैठे इलाज दिया जा रहा था, पर इस साल कोरोना संक्रमण की वजह से सब गड़बड़ हो गया. सरकार ने योजना के लिए तय वार्षिक बजट 21.50 लाख में कटौती कर दी और विभाग को 14 लाख रुपये दिए गए. सूत्र बताते हैं कि यह राशि ढाई महीने पहले खत्म हो गई और राशि खत्म होते ही प्रदेश के 313 विकास खंडों में पशु एम्बुलेंस के पहिए भी थम गए. दो महीने में हजारों किसानों ने हेल्पलाइन पर पशुओं के लिए इलाज मांगा है, पर एम्बुलेंस इलाज करने नहीं पहुंची हैं.

किसानों ने जिला और राज्य स्तर पर इसकी शिकायत की है.सूत्र बताते हैं कि ठेके पर चल रही पशु एम्बुलेंस की टेंडर अवधि भी खत्म हो गई है. विधानसभा उपचुनाव की वजह से नए सिरे से टेंडर बुलाने की प्रक्रिया रुकी रही है. जिस कारण पशुओं को इलाज नहीं मिल रहा है. शिवराज सरकार ने वर्ष 2018 में पशुधन संजीवनी हेल्पलाइन शुरू की थी. ढाई साल में इस योजना से आठ लाख पशुओं को इलाज मिला है. इनमें से पांच लाख से अधिक पशुओं की स्थिति गंभीर थी. इस अवधि में छह लाख से अधिक किसानों ने इस योजना का लाभ लिया है.

घर पहुंच पशु चिकित्सा सेवा में पशुओं को कृत्रिम गर्भधान और टीकाकरण की सुविधा दी भी जा रही थी. इस बारे में पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव जेएन कंसोटिया का कहना है ‎कि योजना के तहत चल रही कुछ एम्बुलेंस की टेंडर अवधि खत्म हो गई है. टेंडर प्रक्रिया चल रही है. अगले महीने तक किसानों के पशुओं को घर पर इलाज मिलने लगेगा.