Monday , 30 March 2020
केजीएमयू में मास्क व सैनेटाइजर को लेकर नोंक झोंक

केजीएमयू में मास्क व सैनेटाइजर को लेकर नोंक झोंक

लखनऊ. कोरोना से बचाव को लेकर सरकार भले ही सतर्क नजर आ रही हो लेकिन इसकी सच्चाई यह है कि चिकित्सा संस्थानों से लेकर अस्पतालों में मास्क एवं सैनेटाइजर उपलब्ध नहीं है. केजीएमयू के कर्मचारी इसकी पर्याप्त कमी को लेकर भड़क गए. इस दौरान उन्होंने हंगामा भी किया. वहीं केजीएमयू के अफसर मामले को किसी तरह दबाने में जुट गए हैं. हांलाकि इससे पूर्व यहां के डॉक्टरों ने भी मास्क व सैनेटाइजर उपलब्ध कराने की मांग की थी. केजीएमयू में 10 हजार से ज्यादा नियमित व संविदा पर कर्मचारी कार्यरत हैं. बड़ी संख्या में कर्मचारियों का सीधा सामना मरीजों से होता है. कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है. इसके बावजूद केजीएमयू में कर्मचारियों को संक्रमण से बचाव के पुख्ता इंतजाम नहीं है. जानकारों के मुताबिक संस्थान में ही एक विभाग के डॉक्टर ने कर्मचारी को डयूटी पर जाने की बात कही तो कर्मचारी ने मास्क व सैनेटाइजर की मांग कर दी. जिस पर चिकित्सक ने उपलब्ध न होने की बात कह दी. जिससे कर्मचारी भड़क गया और हंगामा करने लगा. हांलाकि मामला कर्मचारी परिषद तक पहुंच गया. कर्मचारी परिषद ने तत्काल इस संबन्ध में केजीएमयू सीएमएस डॉ. एसएन शंखवार और कुलसचिव आशुतोष कुमार द्विवेदी से मुलाकात कर मांग पत्र सौंपा. सभी क्लीनिक विभागों में तैनात कर्मचारियों को मास्क व सैनेटाइजर उपलब्ध कराने की मांग की है. परिषद ने गैर जरूरी विभागों को फिलहाल बंद करने की मांग की है. कर्मचारियों ने कहा कि जिन विभागों का अभी काम नहीं है उनके कर्मचारियों को न बुलाया जाए. आपात स्थिति में इन कर्मचारियों को बुलाया जा सकता है. परिषद के अध्यक्ष प्रदीप गंगवार ने कहा कि एनॉटमी, फिजियोलॉजी, सीएफआर दूसरे विभाग के डॉक्टर व कर्मचारियों को ड्यूटी पर बुलाने की जरुरत नहीं है. इससे बेवजह की अस्पताल में भीड़ जुट रही है. जरूरत हो तो इन विभागों के सिर्फ 50 प्रतिशत डॉक्टर व कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जा सकती है. परिषद के मुताबिक लॉक डॉउन पास विभागाध्यक्ष को अपने स्तर से जारी करने की मांग की गई. जिससे कर्मचारियों को ड्यूटी पर आने में कठिनाईयों का सामना न करना पड़े. इसके साथ ही थर्मल स्कैनर उपलब्ध कराए जाने, दंत संकाय में ओपीडी बंद है वहां सिर्फ 50 प्रतिशत कर्मचारियों को रोस्टर के हिसाब से बुलाया जाने, गर्भवती महिला कर्मचारी व अंग प्रत्यारोपण करा चुके कर्मचारियों को अवकाश दिया जाने व छात्रावास और सभी विभागों में तैनात नॉन क्लीनिक कर्मचारियों को रोस्टर के हिसाब से बुलाया जाने की मांग की गई है.