कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव विवाद पर गहलोत को पूर्व ओएसडी लोकेश शर्मा का जवाब, लगाए गंभीर आरोप

jaipur, 9 जून . Rajasthan की राजनीति में एक बार फिर कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है. पूर्व Chief Minister अशोक गहलोत के पूर्व ओएसडी लोकेश शर्मा ने कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव से जुड़े घटनाक्रम पर गहलोत के हालिया बयानों को लेकर तीखा हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया कि अशोक गहलोत तथ्यों को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं और पार्टी आलाकमान के साथ हुए घटनाक्रम को अपने पक्ष में बताने का प्रयास कर रहे हैं.

से बातचीत में लोकेश शर्मा ने कहा, “अशोक गहलोत यह दावा कर रहे हैं कि उनके खिलाफ कोई Political षड्यंत्र रचा गया था, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है. कांग्रेस नेतृत्व ने स्वयं गहलोत को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की इच्छा जताई थी और उन्हें इसकी पूरी जानकारी थी.”

उन्होंने कहा कि 25 सितंबर 2022 को Rajasthan में हुए Political घटनाक्रम के बाद गहलोत को कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करना था, लेकिन उनकी अपनी इच्छा इस पद को स्वीकार करने की नहीं थी.

लोकेश शर्मा ने दावा किया, “उस समय गहलोत ने स्वयं कहा था कि उन्हें दिल्ली की राजनीति और वहां की कार्यप्रणाली समझ में नहीं आती और वे Rajasthan में रहकर ही काम करना चाहते हैं. गहलोत Chief Minister पद छोड़ना नहीं चाहते थे और यही कारण था कि उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में जाने से परहेज किया. गहलोत को इस बात की चिंता थी कि यदि कोई दूसरा नेता Chief Minister बन जाता है तो उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए निर्णयों और विभिन्न मामलों की समीक्षा हो सकती है.”

पूर्व ओएसडी ने कहा कि अशोक गहलोत का Political व्यवहार दोहरे मापदंडों वाला रहा है. उन्होंने याद दिलाया कि 2018 के विधानसभा चुनाव में कम सीटों के बावजूद पार्टी आलाकमान ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें Chief Minister बनाया. शर्मा का आरोप है कि इसके बावजूद गहलोत ने पार्टी नेतृत्व के निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया.

उन्होंने 25 सितंबर 2022 के घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा, “उस दिन कांग्रेस आलाकमान द्वारा भेजे गए पर्यवेक्षकों के सामने जो स्थिति बनी, वह पार्टी नेतृत्व के प्रति असहमति का संकेत थी. यदि विरोध केवल किसी संभावित नेतृत्व परिवर्तन को लेकर था, तो उसका समाधान पार्टी मंचों पर किया जा सकता था, लेकिन उस समय आलाकमान को चुनौती देने जैसा माहौल बनाया गया.”

लोकेश शर्मा ने कहा, “गहलोत हमेशा दबाव की राजनीति करते रहे हैं और 25 सितंबर की घटना भी उसी रणनीति का हिस्सा थी. उस समय यह संदेश देने की कोशिश की गई कि बड़ी संख्या में विधायक गहलोत के साथ हैं और पार्टी नेतृत्व को उनकी शर्तें माननी चाहिए, हालांकि समय के साथ पार्टी नेतृत्व पूरी स्थिति को समझ चुका है.”

उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व के प्रति गहलोत की हालिया टिप्पणियों की भी आलोचना की. शर्मा ने कहा, “कांग्रेस आलाकमान को षड़यंत्रकारी बताना अनुचित और निंदनीय है. पार्टी नेतृत्व ने हमेशा गहलोत को सम्मान दिया और लंबे समय तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपीं.”

लोकेश शर्मा ने कहा कि यदि अशोक गहलोत स्वयं को जननायक मानते हैं तो उन्हें पार्टी से अलग होकर अपनी Political ताकत का परीक्षण करना चाहिए. उन्हें धरातल का पता चल जाएगा. उन्होंने आरोप लगाया कि गहलोत ने कांग्रेस संगठन से बहुत कुछ हासिल किया, लेकिन संगठन को उतना योगदान नहीं दिया जितनी अपेक्षा की जाती थी.

एससीएच/वीसी

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