लोकसभा चुनाव में विदेश नीति भी है मुद्दा, दुनिया में भारत की बढ़ती धाक का श्रेय पीएम मोदी को दे रहे वोटर

नई दिल्ली, 21 अप्रैल . प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में रविवार को एक बार फिर भारत की दुनिया में बढ़ती धाक और विभाजित दुनिया के बीच देश की छवि ‘विश्व बंधु’ के रूप में उभरने का जिक्र काफी विस्तार से किया.

इसी अत्याधुनिक भारत मंडपम में पिछले साल सितंबर में जी20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी हुई थी, जिसमें न केवल भारत की ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ – या ‘विश्व एक परिवार है’ की भावना को बढ़ावा दिया, बल्कि भारत की संस्कृति, विरासत, परंपराओं और उन्नत होती प्रौद्योगिकी को भी पूरी तरह से प्रदर्शित किया.

प्रधानमंत्री ने यहां भगवान महावीर के 2550वें निर्वाण महोत्सव के मौके पर विभाजित दुनिया में भारत के ‘विश्व बंधु’ के रूप में उभरने को लेकर कहा, “आज हम सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों को पूरे विश्वास के साथ वैश्विक मंचों पर रखते हैं. हम दुनिया को बताते हैं कि वैश्विक समस्या का समाधान प्राचीन भारतीय संस्कृति और परंपरा में है. यही कारण है कि भारत अपनी जगह बना रहा है.”

देश में जारी लोकसभा चुनावों के बीच विश्लेषकों का मानना है कि पीएम ने इस बात पर प्रकाश डाला कि संघर्ष के इस समय में “भारत अपने लिए जगह कैसे बना रहा है” जो काफी महत्वपूर्ण है. वह विदेश नीति में अपनी सरकार की उपलब्धियों को मतदाताओं, विशेषकर व्यापक रूप से जागरूक युवा पीढ़ी के सामने रखने में कामयाब रहे हैं. उन्होंने रविवार को कहा कि भारत की बढ़ती धाक इसकी सांस्कृतिक छवि, बढ़ती क्षमताओं और विदेश नीति के कारण है.

भारतीय राजनीति के विशाल परिदृश्य में, जहां घरेलू चिंताएं अक्सर चर्चा का विषय बनी रहती हैं, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सरकार की विदेश नीति को उनकी सरकार की उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है और यह एक महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दा बन गया है.

परंपरागत रूप से, विदेश नीति राजनयिकों और नीति निर्माताओं का क्षेत्र रहा है, जिसकी चर्चा ग्रामीण भारत की धूल भरी सड़कों की बजाय सत्ता के गलियारों में प्रमुखता से की जाती है. हालांकि, अब देश के सुदूर ग्रामीण इलाकों के मतदाता भी राष्ट्रीय सीमाओं से परे मामलों में तेजी से जानकारी प्राप्त कर रहे हैं और चुनाव में इसे एक मुद्दे के तौर पर देख रहे हैं.

विशेषज्ञ लोगों की मानसिकता में आए इस शानदार बदलाव का श्रेय वैश्विक मंच पर भारत की बढ़त और पिछले 10 साल में समय-समय पर मोदी सरकार द्वारा प्रदर्शित कूटनीतिक, भूराजनीतिक और रणनीतिक चतुराई को देते हैं.

हाल के वर्षों में, भारत की विदेश नीति के फैसले राजनयिक दायरे से कहीं अधिक दूर तक गूंजे हैं. पड़ोसी देशों के साथ सीमा तनाव से लेकर वैश्विक साझेदारों के साथ व्यापार समझौतों तक, इन निर्णयों का प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों सहित भारतीय नागरिकों के रोजमर्रा के जीवन पर महसूस किया जा रहा है.

ऐसे में, यह स्वाभाविक है कि विदेश नीति उन मतदाताओं के बीच चर्चा का विषय है. जो इस बात की बेहतर व्याख्या चाहते हैं कि भारत दुनिया के साथ अपने संबंधों को कैसे संचालित करता है. इसलिए, मौजूदा लोकसभा चुनाव में भारत की विदेश नीति भी एक मुद्दा बन गया है.

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस सप्ताह की शुरुआत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “विदेश नीति में देश भर में बढ़ती रुचि का स्वागत है. यह लोकतंत्रीकरण और वैश्वीकरण दोनों को दर्शाता है. मोदी 3.0 इसे और मजबूत बनाएगा.”

भाजपा के 2024 के घोषणापत्र में ‘विश्व बंधु भारत के लिए मोदी की गारंटी’ शीर्षक वाले एक खंड में उल्लेख किया गया है कि कैसे मोदी सरकार ने पिछले 10 वर्षों में भारत को “वैश्विक स्तर पर एक विश्वसनीय और भरोसेमंद आवाज” बनाया है.

भाजपा के ‘संकल्प पत्र’ में कहा गया है, “आज, दुनिया मानती है कि भारत लोकतंत्र की जननी है. दुनिया भर में रह रहे हमारे प्रवासी भारतीय सशक्त और देश से जुड़ाव महसूस कर रहे हैं. हमारे सभ्यतागत मूल्यों, विचारों, ज्ञान और पारंपरिक ज्ञान को विश्व मंच पर गौरव प्राप्त हुआ है. हम अपनी स्थिति और मजबूत करेंगे और विश्व बंधुत्व की भावना के साथ हमारे राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने के लिए अपनी नीतियों का संचालन करेंगे.”

इसमें प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान, संवाद, सहयोग, शांति और समृद्धि के दूरदर्शी 5-एस दृष्टिकोण का उपयोग करके दक्षिण की आवाज के रूप में भारत की स्थिति को और मजबूत करने का उल्लेख किया गया है.

विशेषज्ञ इस बात को मान रहे हैं कि दुनिया में भारत की बढ़ती धाक के बारे में मतदाता अब पहले से कहीं अधिक जागरूक हैं और यह काफी स्पष्ट है क्योंकि सरकार दुनिया के अशांत क्षेत्रों से अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने में लगी हुई है.

विदेश मंत्री ने कहा था कि मोदी की गारंटी ”देश और विदेश में सभी के लिए काम करती है.”

जीकेटी/एकेजे