Sunday , 29 November 2020

पूर्वांचल के किसानों का खेत में ही सुख गया 3.27 अरब रुपये का गन्ना

कुशीनगर (Kushinagar) . उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के पूर्वी इलाके यानी पूर्वांचल में कैन्सर रोग से ग्रस्त गन्ने की फसल के सूखने से किसानों को करीब 3.27 अरब रुपये का नुकसान हूआ है. गन्ने के कैंसर से कुशीनगर (Kushinagar) ही नही पूर्वांचल के तमाम गन्ना बाहुल जिले प्रभावित है. इस रोग से करीब 50 हजार किसानों की 105 लाख कुंतल गन्ने की फसल सूख गई है. जिसमें सर्वाधिक गन्ना कुशीनगर (Kushinagar) में 9330 हेक्टेयर सूखा है. जिसका मुख्य कारण पिछले छह महीने से खेतों में लगा हुआ पानी बताया जा रहा है.

पूर्वांचल में सर्वाधिक गन्ना कुशीनगर (Kushinagar) व देवरिया में उगाया जाता है वही महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बस्ती व संत कबीरनगर जिलों में भी गन्ना प्रमुख नकदी फसल के रुप मे उगायी जाता है. इन जिलों में लगातार हुई बारिश के कारण करीब पचास हजार किसानों के गन्ने की फसल सुख गयी. फसल की बुआई के बाद से लगातार हूई बरिस ने जल जमाव बढा दिया जिससे क्षमता से अधिक लगातार छह महीनों तक जल जमाव के कारण 13703 हेक्टेयर गन्ना सूख गया है. इसमें सर्वाधिक कुशीनगर (Kushinagar) का क्षेत्रफल है.

गन्ना विभाग ने पिछले सितंबर महीने में पर्यवेक्षकों व चीनी मिल के कर्मचारियों की टीम द्वारा खेतों में सूख रहे गन्ने का सर्वे कराया गया तो आकड़े देख सभी हैरत में पड़ गए. इघर सुखते गन्ने को देख जब जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री (Chief Minister) से इस समस्या के बारे में अवगत कराया तो तो बिभाग भी तेज हुआ. हालाकि किसानो के इतने बड़े नुकसान की भरपाई नही हो सकी है. किसान भी खेत में सुख चुके गन्ने को देख छटपटा रहा है. करे तो क्या करे ? किससे कहे और कहने के बाद भी इस नुकसान की भरपाई होगी भी या नहीं इसकी भी कोई गारंटी नही है. हालाकि अभी तक बिभाग द्वारा किसानों के लिये को कुछ खास नही हो सका है. किसान शिवजी त्रिपाठी निवासी घोरघटिया ने बताया कि एक बीघा गन्ने के खेत में सब गन्ना सूख गया है. खेत को खाली करने के लिये मजदूरी देनी पड़ी है. वही अहिरौली दीक्षित निवासी परमेश्वर यादव बताते है कि मै गन्ने के सूखने से इतना परेशान हु की समझ नही आ रहा की क्या करू ?

क्षमता से अधिक 1600 एमएम हुई बरसात

इस वर्ष मार्च महीने से लेकर अगस्त तक रुक रुक कर बारिश होती रही. हालात ऐसे हुए कि गन्ना के खेतों में पानी जमा होता गया. पानी इतना इकट्ठा हो गया कि पानी के कारण ही फसल में कैंसर जैसी बीमारी हो गई. जानकारों के अनुसार गन्ने की फसल के लिए बुआई से लेकर कटाई तक कुल 900 से 1000 एमएम पानी की आवश्यकता पड़ती है. इधर लगातार बारिश के कारण कुशीनगर (Kushinagar) जिले के विभिन्न क्षेत्रों में 12 सौ लेकर 16 सौ एमएम तक वर्षा हुई जो गन्ने की क्षमता से औसतन ज्यादा थी. जिसका खामियाजा गन्ना किसानों को भुगतना पड़ रहा है.

सर्वाधिक सूखने वाली प्रजाति को- 0238

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस वर्ष कुशीनगर (Kushinagar) में सर्वाधिक किसान को-0238 प्रजाति के गन्ने की बुआई किये थे. जो करीब 77 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में बोयी गयी थी. पानी रोकने की क्षमता में कमजोर इस प्रजाति का गन्ना ज्यादा सूखा है. जिससे इस प्रजाति के गन्ने में रेडरॉट कैंसर भी लगा है.

गन्ना क्षेत्रफल व सूखा गन्ना जिलेवार

एक नजर पूर्वांचल के गन्ना क्षेत्रफल पर देखा जाए तो सर्वाधिक गन्ना क्षेत्रफल
कुशीनगर (Kushinagar) – 91117 हेक्टेयर, 9330 हेक्टेयर
देवरिया-10452 हेक्टेयर, 942 हेक्टेयर
महाराजगंज-16500 हेक्टेयर, 1151 हेक्टेयर
बस्ती व संतकबीरनगर- 69000 हेक्टेयर, 1800 हेक्टेयर
सिद्धार्थनगर- 801.836 हेक्टेयर, 80.50 हेक्टेयर

इस सम्बन्ध में वेदप्रकाश सिंह जिला गन्ना अधिकारी ने बताया कि कुशीनगर (Kushinagar) में ढाई लाख किसानों ने 91 हजार हेक्टेयर में गन्ने की बुआई की है. गन्ना विभाग समेत पांच चीनी मिलों के तीन सौ कर्मचारियों की टीम से सितंबर महीने में सर्वे कराया गया था. इसमें रेडरॉट, उकठा रोग व जलप्लावन से 9330 हेक्टेयर गन्ना सूख गया है. इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है.