Friday , 16 April 2021

मजबूरी में किसान छोड़ रहे पारंपरिक फसलें

रामपुर . किसान अपने खेतों में पसीना बहाकर गेहूं, धान, दलहन और गन्ना जैसी पारंपरिक फसलों को लहलहाने में कामयाब तो हो जाता है, लेकिन उसकी आर्थिक स्थिति नहीं सुधरती क्योंकि फसलों का भाव किसान नहीं बल्कि बनिए की दुकान पर खोला जाता है. इसीलिए अब किसान गेहूं धान और गन्ना जैसी पारंपरिक फसलों को छोड़कर अपने खेतों में आलूबुखारा और सेब जैसी फसलें उगाने में जुटे हुए हैं. इस उम्मीद के साथ के शायद इनके द्वारा उनकी आर्थिक स्थिति ठीक हो सके.

किसान हनीफ वारसी ने बताया किसान बहुत परेशान है. किसान को समय से गन्ने का भुगतान नहीं मिलता है. आज हम अगर गन्ना फैक्ट्री को देंगे तो उसका पेमेंट सालों के बाद मिलेगा. जबकि जरूरत हमें आज है. इसलिए किसान ने सोचा है कि हम सेब की बगिया लगा ले आलूबुखारे की बगिया लगा ले. किसान अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए नई नई खेती कर आजमा रहा है. मौजूदा स्थिति में सरकार जो तीन अध्यादेश लाई है उसमें किसान और परेशान हो गया है. जिस कंपनी से कांटेक्ट होगा वह कंपनी अपनी मर्जी से जो चाहेगी वह कृषि करवाएगी.

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