Tuesday , 13 April 2021

मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए 4,000 किमी पदयात्रा करेंगे पूर्व सैनिक रोनित सेन

हैदराबाद . मानसिक स्वास्थ्य को लेकर आज भी समाज में कई प्रकार की भ्रांतियां हैं. लोग आमतौर पर इस पर बात नहीं करते. इससे समस्या बढ़ती जाती है और लोग विभिन्न परेशानियों में उलझ जाते हैं. इसका एक निदान है- जागरूकता. इसी मकसद से एक लाइफ कोच तथा पूर्व सैनिक रोनित सेन कन्याकुमारी से लेह तक 4,000 किलोमीटर की पदयात्रा पर निकले हैं. इस दौरान वह मानसिक स्वास्थ्य के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करने का काम कर रहे हैं. इस क्रम में वह अब तक 1,250 किमी की पदयात्रा कर चुके हैं.

रोनित कहते हैं पहले कभी अवसाद, चिंता, मानसिक स्वास्थ्य जैसे शब्द सुनने को नहीं मिलते थे. खुदकुशी की रिपोर्ट तो कभी-कभार ही आती थी, लेकिन जिस प्रकार से हालात बदले हैं, उससे मुझे लगा कि आज की युवा पीढ़ी के साथ कुछ तो गलत हो रहा है. इस बात का एहसास 2017 में मुझे तब हुआ, जब रीढ़ की तकलीफ के कारण सशस्त्र बल में मेरा कैरियर समाप्त हो गया.

उन्होंने कहा सभी जानते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य के बारे में कई घरों में खुलकर बातें नहीं होती हैं. कोरोना के कारण हमारे समाज में अवसाद के मामले बहुत तेजी से बढ़े हैं. इससे उबरने के लिए मददगार सुविधाएं हैं, लेकिन बहुत ही कम लोग उसका लाभ लेते हैं. ऐसा इसलिए होता है कि अवसाद के लक्षण तथा उसकी देखभाल के लिए हम कभी लोगों को शिक्षित नहीं करते हैं. इंटरनेट मीडिया (Media) में कभी कोई बहस हो जाती है, लेकिन जमीनी सच्चाई नगण्य होती है.

रंजन ने इसे देखते हुए एक पीटिशन अभियान शुरू किया, जिसमें शिक्षा मंत्रालय से 9वीं-12वीं कक्षा तक के पाठ्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य को शामिल किए जाने की मांग की गई है. हालांकि वह कहते हैं कि इसे नॉन-ग्रेडेड पाठ्यक्रम के तौर पर शामिल किया जाना चाहिए, ताकि पढ़ाई का बोझ नहीं बढ़े. लेकिन छात्रों को चर्चाओं, क्रियाकलापों, फीडबैक, व्यायाम, कौशल प्रशिक्षण के जरिए शिक्षित तथा संवेदनशील बनाया जाना चाहिए. उन्होंने स्कूलों में हर साल ‘मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह’ या ‘मानसिक स्वास्थ्य दिवस’ मनाए जाने का भी सुझाव दिया है.
अपने अभियान के तहत रंजन ने कन्याकुमारी से 16 नवंबर, 2020 को अपनी पदयात्रा शुरू की. अपनी इस यात्रा के दौरान वह विभिन्न सरकारी अधिकारियों से मिलते हैं तथा स्कूलों, स्थानीय निकायों और निजी संस्थानों में भी जा रहे हैं.

रंजन ने बताया कि वह अपने अभियान के समर्थन में लोगों से ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दस्तखत करा रहे हैं. मानसिक स्वास्थ्य सभी की पहुंच में होना चाहिए. अभी तक 1,250 किमी की यात्रा कर चुके हैं. इसी क्रम में तमिलनाडु (Tamil Nadu), कर्नाटक (Karnataka) तथा आंध्र प्रदेश (Andra Pradesh)के कई जिलों से होते हुए हैदराबाद पहुंचे हैं. उन्हें 31 मार्च तक दिल्ली पहुंचने का अनुमान है, जहां वह केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक से मिलने की कोशिश करेंगे.

Please share this news