
New Delhi, 12 अप्रैल . मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच जारी खींचतान ने हालात को नाजुक बना दिया है. रक्षा विशेषज्ञ पीके सहगल ने कहा कि जहां तक मेरा मानना है कि बातचीत का भले ही कोई हल न निकला हो, लेकिन अमेरिका अब हमले तेज नहीं करेगा.
उन्होंने कहा कि ट्रंप इस समय काफी ज्यादा मुसीबत में हैं. वो जबरदस्त राजनीतिक तनाव की स्थिति से गुजर रहे हैं. ट्रंप को पता है कि नवंबर में चुनाव होने वाले हैं. अमेरिका की जनता हो या फिर रिपब्लिक पार्टी, ट्रंप पर दबाव बनाए हुए हैं. उनको पता है इस बार उनको जबरदस्त हार का सामना करना होगा. ट्रंप के ऊपर इकोनॉमिक दवाब भी बहुत ज्यादा है. युद्ध से पहले फरवरी महीने में महंगाई 0.9 प्रतिशत थी. अब हालत ये हो गए हैं कि महंगाई की स्थिति 3.3 प्रतिशत हो गई है. ग्रोसरी की कीमतों में जबरदस्त उछाल है. ऐसे में वहां के लोगों में गुस्सा भरा हुआ है. वहीं दूसरी ओर युद्ध में ट्रंप के ट्रूप्स ऑन ग्राउंड उतारने के फैसले के खिलाफ अमेरिका के 93 प्रतिशत लोग हैं. उनके कमांडर भी इस बात के खिलाफ हैं क्योंकि वह जानते हैं कि उस हालात में बड़े पैमाने पर बॉडी बैग्स वापस आएंगे.
सहगल ने कहा कि देखा जाए तो दोनों ही देशों के टीम लीडर डिसीजन मेकर्स थे. इसके बावजूद बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंची. इसका मतलब साफ है, वार्ता के दौरान मुद्दे बहुत ही ज्यादा गंभीर थे और दोनों ही लीडर अपने देश के हित को कायम रखना चाहते थे. लगभग सभी को उम्मीद थी कि इतने गंभीर मसले का हल 21 घंटे की एक बैठक में होना नामुमकिन था. इस मसले का हल ऐसी कई दौर की बैठकों के बाद ही निकाला जा सकेगा.
उन्होंने कहा कि दोनों ही पक्ष कई बिंदुओं पर एकमत नहीं हो पाए. एक तरफ अमेरिका का मत साफ था कि ईरान परमाणु हथियार नहीं रखेगा और न ही ऐसे किसी भी संसाधन का इस्तेमाल करेगा, जो परमाणु हथियार बनाने में सहायक हो सकते हैं. दूसरा गंभीर मुद्दा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का है और तीसरा लेबनान-हिज्बुल्लाह का मुद्दा. ईरान चाहता था कि सीजफायर में लेबनान-हिज्बुल्लाह भी शामिल हों, जबकि अमेरिका और इजरायल इस बात को मानने से इनकार कर रहे हैं. वहीं पाकिस्तान भी इस बात पर सहमत था कि लेबनान सीजफायर की शर्तों में शामिल था. ईरान भी तीन बातों पर अड़ा हुआ है. परमाणु हथियार के मसले पर ईरान ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है. दूसरा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज, इस पर भी ईरान का मत साफ है, वो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को हथियारों से सुरक्षित करना चाहता है. तीसरे मुद्दे में ईरान ने कहा कि सीजफायर का कोई मतलब नहीं है, जब तक हिज्बुल्लाह को इसमें शामिल नहीं किया जाता.
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एवाई/एबीएम