वित्त वर्ष 2026 में रुपए के 85.5-87.5 प्रति डॉलर के दायरे में कारोबार करने का अनुमान

नई दिल्ली, 2 अप्रैल . वित्त वर्ष 2025 में भारतीय रुपए का प्रदर्शन दूसरी वैश्विक मुद्राओं की तुलना में स्थिर रहा. बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा गया कि डॉलर की मजबूती ने सभी प्रमुख करेंसी पेयर्स पर दबाव डाला.

हालांकि, बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष के अंत में डॉलर की मजबूती में उलटफेर और ऋण में एफपीआई के प्रवाह ने रुपए में तेजी को समर्थन दिया, जिसमें घरेलू मुद्रा ने अकेले एक महीने में 2.4 प्रतिशत तक की वापसी की.

आने वाले वर्ष में अस्थिरता का दौर रहने की संभावना है, जिसमें अमेरिकी टैरिफ नीतियों पर इंतजार है. यह यूएस फेड की रेट कार्रवाई के लिए भी मंच तैयार करेगा, जो डॉलर के व्यवहार को भी प्रभावित करेगा.

बैंक ऑफ बड़ौदा की अर्थशास्त्री अदिति गुप्ता ने कहा, “घरेलू मोर्चे पर, रुपए को विकास की संभावनाओं में सुधार, कम मुद्रास्फीति और स्थिर बाहरी घाटे से समर्थन मिलने की संभावना है. कुल मिलाकर उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026 में रुपए 85.5-87.5 प्रति डॉलर के दायरे में कारोबार करेगा.”

वित्त वर्ष 2025 रुपए के लिए एक दिलचस्प वर्ष रहा क्योंकि इसे स्थिरता, तेजी से मूल्यह्रास और कंसोलिडेशन के दौर से गुजरना पड़ा.

वर्ष के पहले 7 महीनों में जहां मुद्रा काफी हद तक सीमित रही, वहीं वर्ष के आखिर में रुपए की चाल में व्यापक उतार-चढ़ाव देखने को मिला.

नवंबर में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार के लिए एक की-कैटेलिस्ट थे क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप की जीत अमेरिकी विकास और मुद्रास्फीति की गतिशीलता पर अनिश्चितता की छाया थी.

इससे फेड की दर में कटौती की उम्मीदों का पुनर्मूल्यन हुआ, जिसने बदले में डॉलर की मांग को बढ़ावा दिया.

गुप्ता ने कहा, “रुपए की किस्मत भी बदलती रही. मार्च से अक्टूबर के बीच, इसमें मात्र 0.8 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि औसत दैनिक वार्षिक अस्थिरता कई वर्षों के न्यूनतम स्तर मात्र 1.5 प्रतिशत पर रही.”

मजबूत घरेलू बुनियादों ने वर्ष के पहले भाग में मुद्रा में स्थिरता की अवधि को रेखांकित किया, वहीं, वर्ष के आखिर में बदलते वैश्विक परिदृश्य ने घरेलू मुद्रा के प्रदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

अमेरिकी टैरिफ रुख वैश्विक मुद्राओं की चाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

रिपोर्ट में बताया गया है, “कुछ उथल-पुथल के बाद, बाजारों ने अमेरिकी टैरिफ कार्रवाइयों को बड़े पैमाने पर स्वीकार कर लिया है, हालांकि, संतुलन एक बार फिर से परखा जाएगा.”

घरेलू पक्ष में, रुपए के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं, जिससे बढ़ती बाहरी चुनौतियों के बीच घरेलू मुद्रा को समर्थन मिलना चाहिए.

एसकेटी/