Friday , 7 May 2021

ऊर्जा विकास उपकर

जबलपुर, 04 जनवरी . आय बढ़ाने के नए स्त्रोत तलाशने में लगी राज्य सरकार (State government) अब ऊर्जा सेस उपकर (एनर्जी डेवलपमेंट सेस) को पांच पैसे प्रति यूनिट बढ़ाकर 148 करोड़ जुटाने जा रही है. यह उपकर उन निजी बिजली उत्पादन कंपनियों पर लगता है जिनका अनुबंध मप्र सरकार के साथ है. इस समय मप्र में शासन, एमबी पॉवर जैसे 25 बड़े बिजली उत्पादनकर्ता और 6 हजार से अधिक छोटे उत्पादक हैं, जिन पर 15 पैसे प्रति यूनिट उपकर लग रहा है. इसे बढ़ाकर 20 पैसे किया जाना है.

सूत्रों के मुताबिक यह उपकर तो कंपनियों पर लगना है, लेकिन जब कंपनियां मप्र की पॉवर जनरेटिंग कंपनी को बिल भेजेगी तो यह उपकर उसमें जोड़ा जा सकता है. साफ है कि देर सवेर यह भार छोटे व बड़े उपभोक्ताओं पर आने की संभावना बढ़ेगी. उनका यह भी कहना है कि उपकर बढ़ाने की तमाम कवायद सिर्फ इसलिए हो रही है ताकि राज्य सरकार (State government) के लिए राजस्व बढ़ाया जा सके. इस समय ऊर्जा विकास उपकर से राज्य सरकार (State government) के खजाने में सालाना करीब 450 रुपए आते हैं. पांच पैसे की वृद्धि के बाद यह राशि 600 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगी.

बिजली विभाग की ओर से तैयार प्रस्ताव कुछ प्रक्रियाओं के बाद जल्द ही कैबिनेट में जाएगा. निजी कंपनियों से तीन से साढ़े तीन हजार करोड़ यूनिट बिजली की खपत होती है. वित्तीय वर्ष 2020-21 में ऊर्जा विभाग के राजस्व संग्रहण का बजट अनुमान तीन हजार करोड़ रुपए रखा गया था. लॉक डाउन और कोरोना संक्रमण के बाद भी अप्रैल से नवंबर की ग्रोथ पिछले साल की तुलना में 10 प्रतिशत से अधिक है.

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