कौवे की घटती जनसंख्या – Daily Kiran
Saturday , 4 December 2021

कौवे की घटती जनसंख्या

अभी पितृपक्ष चल रहा है. भारतीय परंपरा के अनुसार करोड़ों लोग अपने पितरों के श्राद के लिए, भोजन छत पर रखकर, पूजा करते है. और ऐसा मानते है कि जोह कोवे इसको ग्रहण करते है तो सीधा पितरों तक पहुंचता है.

पर बीते कुछ वर्षों से, कोवो का आना बंद हो गया है, इस साल तो शहर भर में किसी मौसम में कौवों के दर्शन नहीं हुए,क्या यह चिंता का विषय नहीं है? और ऐसा नहीं है कि सिर्फ मेरे ही शहर में,अभी हाल ही में परीक्षा देने दूसरे शहर गया, वहां भी इनकी जनसंख्या तो क्या,यह लुप्त ही हो गए है,क्या हम इनकी घटती जनसंख्या को नजरंदाज कर रहे है?
क्या ह में अब पर्यावरण की कोई चिंता नहीं?क्या अब से सिर्फ कौवों की प्रतीकात्मक मूर्ति मिलना चालू हो जाएगी, और हम सिर्फ आने वाली पीढ़ी को किस्से सुनाएंगे की कोवे हुआ करते थे.
याद रखिए कि कोयल का जीवन चक्र भी इसी पक्षी पर टिका है,और भी कई यह प्राणी का जीवन इसके जीने याह लुप्त होने पर निर्भर करता है.

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