Thursday , 24 June 2021

डीयू छात्र देख सकेंगे भगत सिंह की कोठरी

नई दिल्ली (New Delhi) . देश में आजादी की लड़ाई और दिल्ली विश्ववविद्यालय का करीबी संबंध है. डीयू का करीबी संबंध भगत सिंह से भी है. बताया जाता है कि डीयू के वाइस रीगल लॉज (जो वर्तमान में कुलपति का कार्यालय है) के तहखाने में बनी कोठरी में एक दिन के लिए भगत सिंह को ठहराया गया था. डीयू ने यह कोठरी संरक्षित की है. कोठरी में सुराही, लालटेन, शहीदों के चित्र और एक खाट रखी गई है.

शहीद दिवस के अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक डीयू में आएंगे. इस अवसर पर छात्रों को संबोधित भी करेंगे. डीयू के रजिस्ट्रार विकास गुप्ता ने बताया कि शहीद भगत सिंह से जुड़ी यह कोठरी अब आम छात्रों के लिए खुलेगी. हम कोशिश करेंगे कि कॉलेज तृतीय वर्ष के छात्रों को महीने के दूसरे या चौथे शनिवार (Saturday) एक समूह में यहां लाएं और बच्चों को यह दिखाएं. केंद्रीय शिक्षा मंत्री भगत सिंह की कोठरी देखने जाएंगे. इस अवसर पर भगत सिंह स्मारक का भी उद्घाटन होगा. तहखाने के बाहर एक शिला रखी गई है. यह कार्यक्रम शाम साढ़े तीन बजे से शुरू होगा. सभी कॉलेजों में नारा, कविता, गाना और निबंध की प्रतियोगिता आयोजित हुई थी. इसका भी मंचन होगा.

डीयू में इतिहास की प्राध्यापिका और डीयू के संग्रहालय, भगत सिंह की कोठरी के नवीनीकरण से लंबे समय तक जुड़ी रही डॉ. अमृत कौर बसरा बताती हैं कि 2005 में वाइस रीगल लॉज का जब नवीनीकरण किया जा रहा था तभी भगत सिंह की कोठरी का भी नवीनीकरण किया गया. लेकिन, बाद में इसका उद्घाटन किया गया. भगत सिंह ने पहले लाहौर में बर्नी सैंडर्स की हत्या (Murder) और उसके बाद दिल्ली की केन्द्रीय संसद (सेंट्रल असेम्बली) में बम-विस्फोट कर ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध खुले विद्रोह का ऐलान किया था. उन्होंने असेम्बली में बम फेंककर भागने से भी मना कर दिया, जिसके बाद 23 मार्च 1931 को इनके दो अन्य साथियों, राजगुरु और सुखदेव के साथ लाहौर में फांसी पर लटका दिया गया. असेंबली में बम फेंकने के आरोप में ही ट्रायल के दौरान एक दिन के लिए भगत सिंह को यहां रखा गया था. यह हमारे लिए एक भावनात्मक जुड़ाव भी है.

कई प्रामाणिक जानकारी जुटाना अभी बाकी प्रसिद्ध इतिहासकार और भगत सिंह के जीवन को लेकर प्रामाणिक कार्य करने वाले प्रो.चमनलाल बताते हैं कि वह तिथि नहीं मालूम है कि कब भगत सिंह को यहां लाया गया था. लेकिन इसकी प्रामाणिक जानकारी आवश्यक है. भगत सिंह 8 अप्रैल 1929 को गिरफ्तार हुए. अदालत में पेश करने से पहले उनको संसद मार्ग थाना ले जाया गया इसका रिकॉर्ड है. उसके बाद से अदालत में कब पेश किया, कब रिमांड हुई, कब कहां-कहां रखा गया, किसके आदेश पर रखा गया, इसके बारे में प्रामाणिक जानकारी नहीं है. 6 जून 1929 में दिल्ली सेशन कोर्ट में भगत सिंह का ऐतिहासिक बयान है और 12 जून 1929 में सजा सुनाई गई. 14 जून को उनको लाहौर भेजा गया. इस बीच ट्रेन में उन्होंने भूख हड़ताल की, इसलिए उनको दिल्ली में कहीं रखने का यह दिन अप्रैल और मई में से किसी दिन होना चाहिए. दिल्ली पुलिस (Police) या न्यायालय से इसके बारे में रिकॉर्ड लिया जाना चाहिए. मैंने खुद भी दिल्ली पुलिस (Police) कमिश्नर को इसके बारे में काफी लिखा.

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