दुर्लभ पृथ्‍वी खनिज स्थायी चुंबक की घरेलू उत्पादन क्षमता वर्ष 2030 तक 5,000 टन तक पहुंचने की उम्मीद : केंद्र

New Delhi, 25 मार्च . केंद्र Government ने Wednesday को संसद में बताया कि दुर्लभ खनिज और लिथियम की खोज में तेजी से दुर्लभ पृथ्‍वी खनिज स्थायी चुंबक की घरेलू उत्पादन क्षमता वर्ष 2030 तक 5,000 टन तक पहुंच जाएगी.

केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने Lok Sabha में कहा कि India ने दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुंबकों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने और लिथियम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की खोज के लिए प्रयासों को तेज कर दिया है. इसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक उत्पादन क्षमता को 5,000 टन तक पहुंचाना है.

Union Minister ने बताया कि देश की दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुंबकों की वर्तमान आवश्यकता लगभग 4,000 टन है, जिसके वर्ष 2030 तक बढ़कर लगभग 8,000 टन होने का अनुमान है. यह वृद्धि घरेलू क्षमताओं के तेजी से विस्तार की आवश्यकता को दर्शाती है.

उन्होंने आगे कहा कि हाल ही में नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन स्थायी चुम्बकों की प्रायोगिक परियोजना शुरू की गई है, जबकि विशाखापत्तनम में समैरियम-कोबाल्ट चुम्बक संयंत्र को 500 टन प्रति वर्ष की प्रारंभिक उत्पादन क्षमता के साथ चालू कर दिया गया है. अगले चरण में इस क्षमता को बढ़ाकर 2,000 टन और वर्ष 2030 तक 5,000 टन तक पहुंचाया जाएगा.

Government महत्वपूर्ण खनिजों की खोज और विकास में तेजी लाने के लिए समग्र Governmentी दृष्टिकोण के तहत विभिन्न मंत्रालयों के साथ समन्वय के साथ काम कर रही है.

लिथियम और दुर्लभ पृथ्वी तत्व इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा, एयरोस्पेस और अंतरिक्ष अनुप्रयोगों जैसे क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हैं, और स्वच्छ ऊर्जा परविर्तन के साथ-साथ विश्वसनीय ऊर्जा प्रणालियों की आवश्यकता वाली उभरती प्रौद्योगिकियों का समर्थन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.

Union Minister के मुताबिक, India आयात पर निर्भरता कम करने, घरेलू उत्पादन बढ़ाने और भविष्य के औद्योगिक तथा तकनीकी विकास को समर्थन देने के लिए एक मजबूत आपूर्ति श्रृंखला पर ध्यान केंद्रित करते हुए महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में अपनी स्थिति को लगातार मजबूत बना रहा है.

एबीएस/

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