राजस्थान कांग्रेस में असंतोष से गहलोत मंत्रिमंडल के विस्तार की चर्चाएं तेज


जयपुर (jaipur) . कांग्रेस आलाकमान से सलाह-मशविरा के लिए राजस्थान (Rajasthan)के पूर्व उप-मुख्यमंत्री (Chief Minister) और कांग्रेसी नेता सचिन पायलट दिल्ली में हैं. जयपुर (jaipur)में उनके समर्थक विधायक सरकार पर फोन टैपिंग का इल्जाम लगा रहे हैं और बसपा से आए विधायक सरकार को अब यह चेतावनी दे रहे हैं कि वो न होते तो गहलोत सरकार अब तक गिर चुकी होती.

बसपा से कांग्रेस में आए 6 विधायकों में से एक राजेंद्र गुडा ने कहा है कि अगर वो नहीं होते तो गहलोत सरकार पिछले साल बच नहीं पाती. जाहिर है पार्टी में असंतोष से गहलोत मंत्रिमंडल के विस्तार की चर्चाएं तेज हो रही हैं. ऐसा जान पड़ता है कि अब सब अपना हिस्सा मांग रहे हैं. राजेंद्र गुडा ने कहा, ‘इसमें कोई ज्यादा गणित नहीं है. आज से लगभग 11 महीने पहले कुछ विधायक कांग्रेस को छोड़ के चले गए थे और अगर 10 प्लस हम नहीं होते तो सरकार की प्रथम पुण्यतिथि की तैयारी होती. कैबिनेट तो मुख्यमंत्री (Chief Minister) अधिकार क्षेत्र का मामला है. दिल्ली में जिस तरह की बातें चल रही हैं, वफादारियों का क्या होगा, वो कहां जाएंगे.’

बताते चलें कि 11 महीने बाद भी सचिन पायलट खेमे के लोगों को कैबिनेट में जगह नहीं मिली है और राजनीतिक नियुक्तियां भी नहीं हुई हैं. इसी मसले को सुलझाने के लिए वह दिल्ली में हैं, जबकि उनकी बगावत के बाद पिछले साल अक्टूबर में कुमार विश्वास की पत्नी डॉक्टर (doctor) मंजू शर्मा को राजस्थान (Rajasthan)लोक सेवा आयोग में जगह मिली और उसी साल दिसंबर में राजस्थान (Rajasthan)सूचना आयोग में शीतल धनकड़, जो बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनकड़ की भतीजी और कांग्रेसी रणदीप धनकर की बेटी है, की नियुक्ति की गई. मंत्रिमंडल में फेर बदल अब तक क्यों नहीं हुआ, इस सवाल पर गहलोत सरकार का तर्क है कि कोरोना से पहले निपट लें, इसके बाद इस बारे में विचार किया जाएगा.

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