बेंगलुरु, 2 अप्रैल . कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक और प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने राज्य की कांग्रेस सरकार के खिलाफ तीखा हमला बोला है. से बातचीत में उन्होंने डीजल की कीमतों में 2 रुपये की बढ़ोतरी और 18 बीजेपी विधायकों के निलंबन को अवैध और जनविरोधी करार दिया. अशोक ने कहा कि बीजेपी पूरे राज्य में इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही है.
अशोक ने बताया कि बीजेपी विधायकों को विधानसभा में शांतिपूर्ण विरोध के दौरान 18 घंटे के लिए निलंबित कर दिया गया.
उन्होंने कहा, “हम जनता से चुने गए प्रतिनिधि हैं, मनोनीत नहीं. हमारा अधिकार है कि हम जनता की आवाज उठाएं. यह निलंबन सौ प्रतिशत गैरकानूनी है. बीजेपी ने मुस्लिमों के लिए 4 प्रतिशत आरक्षण जैसे मुद्दों पर भी आवाज उठाई थी, लेकिन सरकार ने 80 विधायकों को निलंबित कर दिया. आज स्वतंत्रता पार्क में बीजेपी विधायक, एमएलसी और पूर्व विधायक डीजल मूल्य वृद्धि के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं.”
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने कहा, “पिछले एक साल से कीमतें बढ़ रही हैं. बजट सत्र में मैंने चेतावनी दी थी. अब फिर 2 रुपये की वृद्धि हुई है. यह मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के अहंकार का नतीजा है. सरकार एसी कमरों में बैठकर फैसले ले रही है और आम आदमी की तकलीफों से अनजान है.”
अशोक ने विधानसभा अध्यक्ष से 18 विधायकों का निलंबन तुरंत वापस लेने की मांग की. बोले, “सदन में शांतिपूर्ण विरोध के बावजूद 6 महीने का निलंबन और समिति बैठकों से रोक संविधान के खिलाफ है. अध्यक्ष को सरकार के एजेंट की तरह काम नहीं करना चाहिए.”
उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक निलंबन वापस नहीं होगा, बीजेपी विधायक और एमएलसी किसी भी समिति की बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे.
बीजेपी नेता ने सरकार से डीजल मूल्य वृद्धि वापस लेने की भी अपील की. उन्होंने कहा, “यह फैसला जल्दबाजी में लिया गया. सरकार को आम आदमी के प्रति सहानुभूति दिखानी चाहिए.”
वहीं, भाजपा विधायक महेश तेंगिंकाई ने समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि भाजपा ने विपक्ष के तौर पर अपना काम पूरी ईमानदारी से किया. उन्होंने कहा, “हमने कोई गलत हरकत नहीं की. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हनी ट्रैप का जिक्र किया था और हम 4 फीसदी मुस्लिम आरक्षण के मुद्दे पर विरोध कर रहे थे. यह हमारा हक था. लेकिन सत्ताधारी दल के मंत्रियों ने नियमों का उल्लंघन किया, फिर भी कार्रवाई हमारे 18 विधायकों के खिलाफ हुई.” तेंगिंकाई ने मांग की कि इन विधायकों का निलंबन तुरंत वापस लिया जाए.
उन्होंने कांग्रेस सरकार पर जनता के खिलाफ काम करने का भी आरोप लगाया. तेंगिंकाई ने कहा, “कांग्रेस ने डीजल, पानी, बिजली और दूध की कीमतें बढ़ा दीं. 5 गारंटी के साथ-साथ 10 अतिरिक्त बोझ जनता पर डाले गए हैं. लोग पहले ही परेशान हैं और आने वाले दिनों में कांग्रेस को इसका जवाब देना पड़ेगा.”
तेंगिंकाई ने एक प्रस्तावित विधेयक का जिक्र करते हुए कहा कि यह देश की सुरक्षा के लिए जरूरी है और इसे पास किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, “भाजपा इस बिल का स्वागत करती है. कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं, लेकिन इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा.”
विपक्ष के नेता चालवडी नारायणस्वामी ने कांग्रेस सरकार के फैसले को असंवैधानिक करार दिया. उन्होंने कहा, “कांग्रेस को कानून की समझ नहीं है. 60 साल तक देश पर शासन करने के बाद भी वे ऐसे फैसले ले रहे हैं. 18,000 शिक्षकों और हमारे विधायकों का निलंबन तुरंत वापस लिया जाना चाहिए.” नारायणस्वामी ने चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो भाजपा लगातार विरोध प्रदर्शन करेगी.
उन्होंने कहा, “कांग्रेस ने 5 गारंटी दीं, लेकिन अब जनता पर बोझ डाल रही है. 138 विधायकों के साथ सत्ता में आने के बाद भी वे सिर्फ 28 का काम कर रहे हैं. हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे और जनता के लिए लड़ते रहेंगे.”
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एसएचके/केआर