कोर्ट के आदेश के बावजूद भी उस पर कार्रवाई नहीं होती है: सोमनाथ भारती – Daily Kiran
Saturday , 23 October 2021

कोर्ट के आदेश के बावजूद भी उस पर कार्रवाई नहीं होती है: सोमनाथ भारती

नई दिल्ली (New Delhi) . आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता सोमनाथ भारती ने कहा कि भाजपा की केंद्र सरकार (Central Government)और भाजपा शासित एलजी ऑफिस भू माफियाओं को डीडीए की सरकारी जमीनों पर कब्जा कराने में लगा हुआ है. कोर्ट के आदेश के बावजूद भी उस पर कार्रवाई नहीं होती है और भू माफियाओं को पुलिस (Police) की उपलब्धता ना होने जैसी बचकाना बहानेबाजी के आड़ में कोर्ट से स्टे आर्डर लाने की सहूलियत देते हैं. हौज खास एसडीएम निधि 15 सितंबर को डीडीए की जमीन पर अवैध कब्जे की पैमाइश करने के लिए पहुंची. भाजपा नेताओं की ओर से पैमाइश के काम में बाधा पहुंचायी गई और अभद्रता की गई. भाजपा नेता शैलेंद्र सिंह मोंटी ने डीडीए की जमीन पर द रोज होटल (Hotel) बनाया है. इन्हीं के आदमी ने एसडीएम को पैमाइश करने से रोका है. उन्होंने कहा कि डीडीए का जब से सदस्य बना हूं तभी से इस मुद्दे को बार-बार उपराज्यपाल के सामने उठा रहा हूं. हर बार उपराज्यपाल इसके ऊपर कार्रवाई करने के लिए कहते हैं लेकिन कार्रवाई होती नहीं है. ऐसे में क्या भूमाफिया को राजभवन से संरक्षण प्राप्त है. क्योंकि एसडीएम को भू माफिया डिमार्केशन करने से रोक रहे हैं.

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और डीडीए सदस्य सोमनाथ भारती ने शुक्रवार (Friday) को प्रेसवार्ता को संबोधित किया. सोमनाथ भारती ने कहा कि दिल्ली के अंदर भूमाफिया डीडीए और केंद्र सरकार (Central Government)के ऊपर कब्जा जमाए बैठे है. अब यह सबके सामने आ गया है. भू माफियाओं को संरक्षण डीडीए और भाजपा नेताओं से मिल रहा है. दिल्ली में 15 सितंबर को एसडीएम हौज खास निधि सरोहे अवैध कब्जे की पैमाइश के लिए पहुंची. डीडीए की जमीन पर बनी हुई व्यावसायिक संपत्ति की पैमाइश के लिए पहली बार एसडीएम पहुंची थी. डीडीए की जमीन की पैमाइशन का काम 2013 से लंबित है. इसके बावजूद एसडीएम को पैमाइश का काम करने में बाधा पहुंचाते हैं और कुछ भी कहने से कतराते नहीं हैं. एसडीएम जब डिमार्केशन करने जाती हैं तो उनको धमकी मिलती है. भू माफियाओं को इतनी ताकत कहां से मिलती है. एसडीएम निधि सरोही बधाई के पात्र हैं कि जिन्होंने मौके पर भू माफियाओं का सामना किया. सोमनाथ भारती ने कहा कि यह दोनों व्यक्ति शैलेंद्र सिंह मोंटी भाजपा का नेता है और एमएलए का चुनाव लड़ा है. इसके साथ में भाजपा नेता शैलेंद्र सिंह का आदमी है, जिसके खिलाफ कई एफआईआर (First Information Report) दर्ज है. एसडीएम को इसी व्यक्ति ने पैमाइश करने से रोका है और अभद्रता की है.

उन्होंने कहा कि हौज खास गांव में द रोज नाम से होटल (Hotel) है. यह होटल (Hotel) डीडीए जमीन पर खसरा नंबर 277 पर तत्कालीन स्थानीय पार्षद शैलेंद्र सिंह मोंटी ने बनाया है. इसके खिलाफ कई बार उपराज्यपाल से मिलकर आवाज उठायी कि इस संपत्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाए. उन्होंने कहा कि उपराज्यपाल की मौजूदगी में डीडीए कहता है कि इस मामले के अंदर 4 केस है. जीएनसीटीडी के उच्च अधिकारियों ने राजस्व विभाग को निर्देश दिए हैं कि डिमार्केशन के काम को पूरा किया जाए. जिसके बाद राजस्व विभाग ने संबंधित विभाग को नोटिस जारी किया है और डिमार्केशन के संबंध में 3 सितंबर को बैठक भी की. डीडीए की राजस्व शाखा ने डिमार्केशन के प्लान में कुछ कमियां बतायी हैं. जिन्हें दूर कर अंतिम रिपोर्ट को कोर्ट में दाखिल किया जाएगा. डीडीए एक तरफ पिछले 8 साल से कह रहा है कि इसकी पैमाइश होनी है. दूसरी तरफ जब पहली बार पैमाइश के लिए एसडीएम साइट पर जाती है तो भूमाफिया कह रहे हैं कि कोर्ट से स्टे आर्डर है. यह किस तरह की मिलीभगत है. डीडीए की जमीन पर राजनीतिक ताकत का इस्तेमाल करके अवैध कब्जा किया जाता है और द रोज नाम से होटल (Hotel) बना दिया जाता है.

पूर्व मंत्री सोमनाथ भारती ने बताया कि डीडीए डिमोलिशन का आर्डर 2015 में पास करती है, क्योंकि हाईकोर्ट रिट पिटीशन 5429/2015 पर 26 मई 2015 को डीडीए को निर्देश देता है कि इसको डिमोलिश कर 6 सप्ताह के अंदर अतिक्रमण को हटा दें. इसके बाद डीडीए के कुछ अधिकारियों ने मिलीभगत कर कहा कि पुलिस (Police) उपलब्ध नहीं है. जिसके जरिए इन लोगों को वक्त दिया कि उच्च न्यायालय जाएं और स्टे आदेश ले आएं. यह मामला तभी से चला आ रहा है. यह मामला बार-बार उपराज्यपाल के सामने आता है. उन्होंने कहा कि हौज खास स्थित खसरा नंबर 277 की जमीन का डीडीए ने 1967 में अधिग्रहण किया था. इन लोगों ने 1996 में यह कहते हुए अवैध कब्जा किया कि यह जमीन किसी अन्य खसरे में है. तत्कालीन क्षेत्रीय पार्षद शैलेंद्र सिंह मोंटी की पत्नी रेनू सिंह ने 2009 में खरीदा. इसके बाद रेनू सिंह ने 2013 में किसी को आगे बेच दिया. इसके बाद उच्च न्यायलय ने 26 मई 2015 को डीडीए को निर्देश दिया की इसको डिमोलिश करें. इसके बाद डीडीए ने डिमोलिशन के आदेश जारी किए. लेकिन अभी तक डिमोलिशन नहीं किया गया है.

उन्होंने कहा कि इस तरह के 4 मामलों में से दो जिला कोर्ट और दो हाईकोर्ट में है. उसी जमीन पर स्टे आर्डर में रिट पिटीशन 255/2017 है और सिविल सूट भी है. मेरी कानूनी जानकारी में पहले कभी नहीं आया कि एक ही मामले पर सिविल सूट और रिट पिटिशन, दोनों डाल रखे हो. डीडीए की मिलीभगत से कानूनी जटिलता बढ़ाकर राजनीतिक प्रभाव से सरकारी जमीन पर कब्जा कर द रोज होटल (Hotel) चल रहा है. पूर्व मंत्री सोमनाथ भारती ने कहा कि आदेश को लोअर कोर्ट के अंदर चुनौती दी गई है. इस मामले में कमिश्नर विकास से मैंने स्टे आदेश मांगा. जिसका हवाला बार-बार देते हैं कि कार्रवाई नहीं कर सकते. कमिश्नर विकास कहते हैं कि यह देखना पड़ेगा कि स्टे आदेश आपको दे सकते हैं या नहीं दे सकते हैं. इससे आप समझ सकते हैं भूमाफियाओं को किस प्रकार का संरक्षण प्राप्त है. कोर्ट का स्टे आदेश जो कि पब्लिक दस्तावेज हैं, उसको लेक डीडीए के सदस्य को कहा जा रहा है कि यह देखना पड़ेगा कि उसे दे सकते हैं या नहीं.

उन्होंने कहा कि डीडीए का जब से सदस्य बना हूं तभी से इस मुद्दे को बार-बार उपराज्यपाल के सामने उठाता हूं. उप राज्यपाल हर बार कहते हैं कि इस मामले को देखा जाए. ऐसे में उपराज्यपाल से सवाल है कि क्या भूमाफिया को राजभवन से संरक्षण प्राप्त है. क्योंकि इस प्रकार से भू माफिया एसडीएम को डिमार्केशन करने से रोका रहे हैं. भाजपा के नेताओं को खुली छूट है कि डीडीए की जमीनों पर कब्जा-अतिक्रमण करके व्यावसायिक ढांचे बनाएं. डीडीए सदस्य और क्षेत्र के विधायक के रूप में एलजी की अध्यक्षता वाली बैठक में लगातार मुद्दे को उठा रहे हैं. वहां पर सिर्फ यही सुनने को मिलता है कि इसको देख लिया जाए. पिछले 6 साल से इस मामले को उठाना शुरू किया है. हर बार उपराज्यपाल इसके ऊपर कार्रवाई करने के लिए कहते हैं, लेकिन कार्रवाई होती नहीं है. पूर्व मंत्री ने कहा कि इस प्रकार के नेक्सस का कनेक्शन एलजी हाउस से दिख रहा है. भाजपा शासित केंद्र सरकार (Central Government)और भाजपा शासित एलजी का ऑफिस भू माफियाओं को डीडीए की सरकारी जमीनों पर कब्जा कराने में लगा हुआ है. उसके बाद भूमाफिया सरकारी जमीन पर कोई भी काम कर सकते हैं. कोर्ट के डिमोलिशन ऑर्डर के बावजूद भी उस पर कार्रवाई नहीं होती है.

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