नई दिल्ली, 5 अप्रैल . दिल्ली सचिवालय के पास शुक्रवार को सीएसआईआर-सीआरआरआई, दिल्ली के सहयोग से गड्ढों की मरम्मत की नई तकनीक इकोफिक्स मैटेरियल का लाइव डेमोंस्ट्रेशन किया गया. इस अवसर पर दिल्ली के पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा भी उपस्थित थे. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए इस तकनीक के लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी.
मंत्री प्रवेश वर्मा ने बताया कि दिल्ली में गड्ढों की समस्या एक बहुत बड़ी चुनौती बन गई है, खासकर बारिश के दौरान, जब सड़कों पर छोटे-बड़े गड्ढे बन जाते हैं और लोगों को मुश्किलें होती हैं. हमने केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) के साथ इस समस्या का समाधान खोजने के लिए बैठक की. सीआरआरआई ने हमें अपनी पेटेंट तकनीक का ट्रायल दिया, जो बेहद प्रभावी साबित हो रही है. हम पहले पारंपरिक तरीके इस्तेमाल करते थे, उसमें समस्या यह थी कि गड्ढे में अगर पानी था, तो उसे भरने में समस्या आती थी. खासकर बारिश के मौसम में यह समस्या और बढ़ जाती थी. लेकिन अब इकोफिक्स मैटेरियल की मदद से गड्ढे को आसानी से भरना संभव हो गया है, चाहे गड्ढे में पानी हो या न हो.
प्रवेश वर्मा ने बताया कि सीआरआरआई द्वारा किए गए ट्रायल में एक गड्ढे में पानी था और दूसरे गड्ढे में नहीं. दोनों गड्ढों को इस नए मटेरियल से भरा गया और 10 मिनट बाद उन पर गाड़ी चलाई गई. उन्होंने देखा कि गड्ढा भरने के बाद, उस पर कोई डिप्रेशन या फैलाव नहीं हुआ. यह तकनीक बहुत प्रभावी है और इस पर काम कर रहे हैं ताकि दिल्ली में गड्ढों को जितनी जल्दी हो सके भरा जा सके. हम यह देख रहे हैं कि कौन सा तरीका सस्ता पड़ेगा और साथ ही सबसे ज्यादा गारंटी वाला होगा, ताकि गड्ढा अगर फिर से टूटे, तो सरकार को बार-बार पैसा खर्च न करना पड़े. सीआरआरआई ने हमें यह बताया है कि उनकी तकनीक काफी सस्ती है और यह हमें ढाई साल की वारंटी भी देती है. अगर गड्ढा टूट जाता है, तो उन्हें फिर से ठीक किया जाएगा.
सीएसआईआर के निदेशक प्रोफेसर मनोरंजन परिदा ने समाचार एजेंसी से बात करते हुए कहा कि सड़कों पर गड्ढे (पॉटहोल) एक बड़ी समस्या है, खासतौर पर बारिश के मौसम में. बरसात में इन गड्ढों की मरम्मत करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि सड़क की सतह जलभराव से प्रभावित होती है. पारंपरिक तरीकों से गड्ढों की मरम्मत में छह से आठ महीने तक का समय लग जाता था. लेकिन, अब हमारे पास एक नई तकनीक है और यह एक तत्काल सड़क मरम्मत समाधान है, जिसके लिए जलभराव वाले गड्ढों से पानी निकालने की जरूरत नहीं पड़ती.
उन्होंने कहा कि गड्ढों की मरम्मत के लिए हमारे पास जो मिश्रण है, यह बहुत ही उच्च प्रतिरोधी है और भारी यातायात, जैसे ट्रकों के भार को सहन कर सकता है. इसे लगाने के बाद मात्र 10 से 15 मिनट में कॉम्पैक्ट करके सड़क को चालू किया जा सकता है. इसकी स्थायित्व ढाई साल तक की है, जैसा कि परीक्षणों में साबित हुआ है. इस तकनीक से सड़कें ढाई साल तक गड्ढों से मुक्त रह सकती हैं और सतह बरकरार रहती है. यह न केवल समय बचाती है, बल्कि बारिश के मौसम में भी प्रभावी मरम्मत को संभव बनाती है.
संस्थान के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक सतीश पांडे ने कहा कि यह प्रोसेस्ड स्टील स्लैग से बना एक रेडी टू यूज पॉटहोल रिपेयर सामग्री है. हमने इसका उपयोग करके गड्ढों की मरम्मत की है. आमतौर पर जब पॉटहोल को ठीक करना होता है, तो सबसे पहले पानी निकालना पड़ता है और बारिश के मौसम में जलभराव की स्थिति में सड़क की मरम्मत बेहद मुश्किल होती है. लेकिन, इस सामग्री से आप बिना पानी निकाले गड्ढों को ठीक कर सकते हैं और सड़क की मरम्मत कर सकते हैं. यह एक तत्काल सड़क मरम्मत समाधान है. यह मिश्रण बहुत उच्च प्रतिरोधी है और भारी यातायात, जैसे ट्रकों के भार को सहन कर सकता है. इसे लगाने के बाद सिर्फ 10 से 15 मिनट में कॉम्पैक्ट करके सड़क को चालू किया जा सकता है.
परीक्षणों के अनुसार, यह सड़कों को ढाई साल तक गड्ढों से मुक्त रखता है और सतह को बरकरार रखता है. पारंपरिक तरीकों से पॉटहोल की मरम्मत में छह से आठ महीने लगते थे, लेकिन यह नई तकनीक समय बचाने के साथ-साथ प्रभावी समाधान प्रदान करती है.
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पीएसके/एकेजे