दिल्ली हाई कोर्ट ने कर पुनर्मूल्यांकन को चुनौती देने वाली कांग्रेस की याचिका खारिज की

नई दिल्ली, 22 मार्च . दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को आयकर (आईटी) विभाग द्वारा पार्टी के खिलाफ शुरू किये गये पुराने कर-आकलन को चुनौती देने वाली कांग्रेस की याचिका खारिज कर दी.

जस्टिस यशवंत वर्मा और पुरुषेंद्र कुमार कौरव की खंडपीठ ने आदेश सुनाते हुए कहा, “हम रिट याचिकाएं खारिज करते हैं.”

यह कांग्रेस के लिए एक ताजा झटका है क्योंकि पार्टी के शीर्ष नेताओं ने गुरुवार को एक प्रेस वार्ता आयोजित कर केंद्र सरकार पर निशाना साधा और उसके फंड को रोकने तथा 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी के अभियान में “बाधा” डालने का आरोप लगाया.

राहुल गांधी और अन्य शीर्ष नेताओं के साथ एक दुर्लभ प्रेस कॉन्फ्रेंस में सोनिया गांधी ने दावा किया कि कांग्रेस के चुनाव अभियान को पटरी से उतारने के मकसद से मोदी सरकार के इशारे पर आईटी विभाग ने पार्टी के बैंक खाते फ्रीज कर दिए हैं. कांग्रेस नेताओं ने सत्तारूढ़ दल पर प्रतिशोध की राजनीति का आरोप लगाया और दावा किया कि आयकर अधिकारी आकलन वर्ष 1994-95 की ‘कर चूक’ की जांच कर रहे हैं, जब सीताराम केसरी पार्टी अध्यक्ष थे.

विशेष रूप से, उच्च न्यायालय ने 20 मार्च को अपने खिलाफ कर पुनर्मूल्यांकन कार्यवाही के खिलाफ कांग्रेस की याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया था.

कांग्रेस खुद को मुसीबद में पा रही है क्योंकि आयकर विभाग ने लगातार तीन वित्त वर्षों – 2014-15, 2015-16 और 2016-17 – के लिए पार्टी के खिलाफ ‘कर वसूली’ शुरू की थी.

सुनवाई के दौरान, कांग्रेस की ओर से बहस करते हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने मामले को “आधारहीन” बताते हुए कहा कि कर अधिकारी सीमा से बंधे हैं और विभाग अधिकतम छह मूल्यांकन वर्षों से पीछे नहीं जा सकता है. हालाँकि, वह अपनी बात साबित करने में विफल रहे, जिसके कारण कांग्रेस की याचिकाएँ खारिज कर दी गईं.

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