Saturday , 19 June 2021

ताणा राजपरिवार के राजराणा हरि सिंह जी झाला का देहावसान

उदयपुर (Udaipur). मेवाड़ में झाला राजवंश के ठिकाने ताणा के 10 वे राजराणा हरि सिंह जी साहेब का आज राजमहल ताणा में निधन हो गया. आपका जन्म 30 नवंबर 1931 में हुवा था तथा 13 नवंबर 1949 में आप अपने दादाजी राजराणा रतन सिंह जी के देहावसान के उपरांत ताणा जी राजगद्दी पर बिराजे थे. इस प्रकार देसी रियासतों के विलीनीकरण व जागीरी उन्मूलन के पूर्व राजगद्दी पर बिराजने वाले शायद राजस्थान (Rajasthan)में ये अंतिम जागीरदार थे जिनका आज देहावसान हो गया.

आपकी शिक्षा भूपाल नोबल्स संस्थान उदयपुर (Udaipur) में हुई थी. आप इतिहाद, संस्कृत व मेवाड़ी रीतिरिवाजों जे ज्ञाता थे. अनेक क्षेत्रों में आपने उल्लेखनीय कार्य किया. जिसमे मुख्यरूप से दिल्ली में संसद भवन स्थित महाराणा प्रताप का स्मारक स्थापना में आपका खास योगदान रहा.आप ही के द्वारा प्रस्तवित परिकल्पना पर को भारतीय संसद में पास करवा कर आदरणीय जसवंत सिंह जी ने उसे साकार रूप दिलवाया.आप देसी राजाओं के मंडल नरेन्द्र मंडल के सचिव, महाराणा मेवाड़ फाउंडेशन के संस्थापक सचिव, भुवाल नोबल्स संश्थान के मैनेजिंग डायरेक्टर, भारतीय राष्ट्रीय संस्कृति व कला ट्रस्ट INTACH से भी लंबे समय से जुड़े रहे.

आप के देहावसान की ख़बर सुनकर सम्पूर्ण मेवाड़ में खासकर क्षत्रिय समाज मे शोक ली लहर व्याप्त हो गई. आपका अंतिम संस्कार ठिकाना ताणा स्थित राजपरिवार के महासतिया में किया गया. जंहा आपके पुत्र कैप्टन कुंवर नारायण प्रताप सिंह ने मुखाग्नि दी उक्त जानकारी राजराणा साहब के भतीजे व अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के संयोजक भवानी प्रताप सिंह ताणा ने दी.

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