Sunday , 29 November 2020

CTAE में युवाओं के लिए रोजगारपरक व्यावसायिक पाठ्यक्रम आरम्भ

उदयपुर. प्रौद्योगिकी एवं अभियांत्रिकी महाविद्यालय जो कि महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर की संघटक ईकाई है, ने युवाओं/ अभियन्ताओं / उद्यमियों को व्यापक व्यावसायिक दृष्टिकोण प्रदान करने एवं दक्षता विकसित करने के लिए 33 व्यावसायिक पाठ्यक्रम तैयार किये हैं. एमपीयूटी के कुलपति डॉ. नरेन्द्र सिंह राठौड़ ने बताया कि सीटीएई में इन रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के द्वारा युवाओं में कौशल एवं दक्षता विकसित करने तथा आत्मनिर्भर बनाने की अपार संभावना है. सभी युवा तथा अभियंता इन पाठ्क्रमों के माध्यम से स्वरोजगार और कौशल प्राप्त कर स्वंय का उद्यम स्थापित कर सकते हैं. वर्तमान में इन व्यावसायिक पाठ्यक्रमों का महत्व और भी बढ़ जाता है क्यांकि युवा अपने घर से ही संचार माघ्यमों द्वारा इसमे शामिल हो सकते हैं तथा आत्मनिर्भर भारत की और अपने कदम बढ़ा सकते हैं.

महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. अजय कुमार शर्मा ने बताया कि फिलहाल विभिन्न विभागों द्वारा 31 अगस्त से 18 पाठ्यक्रम ऑन-लाइन प्रारम्भ किये जायेंगे, जिसके लिए प्रवेश हेतु 27 अगस्त तक आवेदन मांगे गये हैं. डॉ. शर्मा ने बताया कि वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए जल ग्रहण विकास सेक्टर एवं कृषि में प्रयुक्त डीजल इंजन की मरम्मत, बायोगैस प्रौद्योगिकी, आधुनिक तकनीकों द्वारा विद्युत क्षेत्रों का राजस्व संरक्षण, सौर फोटोवोल्टीक तकनीशियन, टी.आई.जी/एम.आई.जी वेल्डिंग, निर्माण सामग्री परीक्षण, आप्टिकल फाइबर लिंक परीक्षण तथा पाईथॉन डेटा सांइस इत्यादि के लीक से हट कर तकनीकी क्षेत्रों मे ऑनलाइन पाठ्यक्रम तैयार किये गये है. इन पाठ्यक्रमों के माध्यमों से संगठित क्षेत्रों के लिए विशेष शिक्षा द्वारा कौशल विकसित किया जायेगा.

इन पाठ्यक्रमों के लिए कोई आयु सीमा निर्धारित नहीं है तथा कक्षा ऑठवीं पास से लेकर इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त युवा भी इन मे भाग ले सकते हैं. यहॉं तक कि जो विद्यार्थी अपनी शिक्षा छोड़ चुके हैं या किसी कारणवश पूरा नहीं कर पाये उनके लिए भी स्वर्णिम अवसर है. पूरा पाठ्यक्रम तथा आवेदन करने का तरीका विश्वविद्यालय की वेबसाईट ूूण्उचनंजण्ंबण्पद पर उपलब्ध है. व्यवसायिक पाठ्यक्रम के समन्वयक डॉ. पी.के.सिंह ने बताया कि इन पाठ्यक्रमों के प्रारम्भ होने के उपरान्त युवाओं में रोजगार उपलब्ध होगा तथा उद्यमी बनने मे भी सहायक होगा. इस प्रकार हम आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ सकते है.