Monday , 26 July 2021

एनजीटी में अवमानना याचिका दायर

जबलपुर, 22 मार्च . यह बड़ी विडंबना है कि 6 मार्च को ग्वारीघाट में राष्ट्रपति के कार्यक्रम के बावजदू भी नर्मदा में बीना उपचार का सीवेज जल मिलना बंद नहीं किया गया. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल नई दिल्ली (New Delhi) द्वारा 23 फरवरी को जारी आदेश की अनदेखी की गई है तथा ग्वारीघाट, तिलवाराघाट में मिल रहे गंदे नालों को बंद नहीं किया गया हैं, इस कारण नगर निगम जबलपुर (Jabalpur)तथा दोषी अधिकारियों से दंड की राशि 2 माह के भीतर वसूली जायें. यह प्रार्थना करते हुये डॉ.पीजी नाजपांडे, अध्यक्ष नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच, रजत भार्गव तथा एड.दिपांशु राय ने एनजीटी में अवमानना याचिका दायर की है. एड.प्रभात यादव याचिका की पैरवी करेेंगे.

याचिकाकर्ताओं ने आशंकाएं व्यक्त कर पूर्व में एनजीटी में याचिका की थी कि नर्मदा जयंती एवं महाशिवरात्रि आयोजन प्रदूषण मुक्त हो, ग्वारीघाट, तिलवाराघाट, लम्हेटाघाट तथा पंचवटी में बीना उपचार का सीवेज जल, छोड़ा जाना बंद किया जाये, ‘‘प्रदूषक से क्षतिपूर्ति’’ इस सिद्धांत पर नगर निगम जबलपुर (Jabalpur)से मुआवजा वसूला जायें. एनजीटी ने इन आशंकाओं को संज्ञान में लेते हुये आदेश जारी किये थे कि नगर निगम, कलेक्टर, जबलपुर (Jabalpur)तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस संबंध में कार्रवाई करें.

अवमानना याचिका में बताया है कि याचिकाकर्ताओं की आशंकाएं सही निकली. 19 फरवरी को आयोजित नर्मदा जयंती तथा 11 मार्च को आयोजित शिवरात्रि मेले में नर्मदा तटों एवं जल में प्रदूषण पैâल गया. आज तक ग्वारीघाट, तिलवाराघाट के नाले बंद नहीं हुये राष्ट्रपति का कार्यक्रम ग्वारीघाट में आयोजित किया गया, फिर भी गंदा जल नर्मदा में मिलना बंद नहीं हुआ.

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