Friday , 14 May 2021

CWC बैठक में कांग्रेस ने केंद्र को घेरा, सरकार का भारी कुप्रबंधन देखने को मिला

नई दिल्ली (New Delhi) . कांग्रेस की शीर्ष नीति निर्धारक इकाई कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) ने शनिवार (Saturday) को आरोप लगाया कि कोरोना (Corona virus) महामारी (Epidemic) से निपटने में केंद्र सरकार (Central Government)का भारी कुप्रबंधन और अक्षमता देखने को मिली है. पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी की अगुवाई में हुई सीडब्ल्यूसी की बैठक में फैसला किया कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पार्टी के सुझावों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) को पत्र भेजेंगे. कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया कि कांग्रेस कार्य समिति ने नेताओं और कार्यकर्ताओं से कहा है कि वे देश भर में जरूरतमंद लोगों की मदद करें. प्रदेश कांग्रेस कमेटियों से कहा गया है कि वे राज्य स्तर पर कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन स्थापित करें ताकि लोगों की मदद की जा सके.

सीडब्ल्यूसी की बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया, भारत में कोविड-19 (Covid-19) का पहला मामला 30 जनवरी, 2020 को सामने आया था. भारत में कोविड का पहला टीका 16 जनवरी, 2021 को लगाया गया था. इन दो तारीखों के बीच और उसके पश्चात, त्रासदी, अक्षमता और भारी कुप्रबंधन की एक विस्तृत गाथा है. कांग्रेस कार्य समिति ने आरोप लगाया कि पहले दिन से ही केंद्र सरकार (Central Government)ने महामारी (Epidemic) के नियंत्रण से संबंधित सभी शक्तियां और अधिकार अपने हाथों में ले लिए. उसने कहा, महामारी (Epidemic) अधिनियम और आपदा प्रबंधन अधिनियम के अंतर्गत केंद्र सरकार (Central Government)का हर आदेश तथा निर्देश कानून बन गया और राज्य सरकारों के पास प्रशासनिक उपायों को अपनाने तथा लागू करने का कोई अधिकार या स्वतंत्रता नहीं रही.

कांग्रेस की शीर्ष इकाई ने कहा, संक्रमण से निपटने के लिए केंद्र सरकार (Central Government)द्वारा किए गए प्रारंभिक उपाय सतही थे. जब कोई टीका या उपचार उपलब्ध नहीं था, ऐसी पस्थितियों में रोकथाम ही मात्र विकल्प था. उसके लिए ‘टेस्टिंग, ट्रैकिंग, ट्रेसिंग और ट्रीटमेंट की आवश्यकता थी. लेकिन इस दिशा में भी केंद्र सरकार (Central Government)का प्रयास अपर्याप्त रहा. उसने आरोप लगाया, केन्द्र सरकार इस संबंध में पर्याप्त जन जागरूकता पैदा करने में असफल रही कि महामारी (Epidemic) का घटता हुआ प्रकोप महामारी (Epidemic) की दूसरी लहर का सूचक हो सकता है, जो कि पहली लहर की तुलना में अधिक विनाशकारी हो सकता है. पर्याप्त धन और अन्य रियायतें प्रदान करके भारत में दो स्वीकृत टीकों के उत्पादन और आपूर्ति में तेजी से वृद्धि करने में विफलता रही.

भारत में अन्य टीका बनाने वाली कंपनियों के स्वीकृत टीकों के अनिवार्य लाइसेंसिंग और उत्पादन का विकल्प अपनाने में विफलता रही. सीडब्ल्यूसी ने कहा, पहले चरण में स्वास्थ्य कर्मियों और अग्रिम पंक्ति के कर्मियों के टीकाकरण के बाद सार्वभौमिक टीकाकरण लागू करने में विफलता रही. टीकाकरण कार्यक्रम में पूर्व पंजीकरण और नौकरशाही नियंत्रण से छुटकारा दिलाने में विफलता रही. टीकाकरण का क्रियान्वयन राज्य सरकारों और सरकारी तथा निजी अस्पतालों को सौंपने में विफलता रही.

उसने दावा किया, टीके की खुराक की बर्बादी को रोकने या कम करने में विफलता रही, जिस कारण आज 23 लाख से भी अधिक खुराक बर्बाद हो चुकी है. संक्रमित व्यक्तियों और उनके संपर्कों की टेस्टिंग, ट्रैकिंग और ट्रेसिंग के परिमाण और गति को बनाए रखने में विफलता देखने को मिली. उसने यह आरोप भी लगाया, आत्मनिर्भरता के अव्यावहारिक जोश के कारण अन्य ऐसे टीकों के आपातकालीन उपयोग की मंजूरी देने में विफलता रही, जिन्हें अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ और जापान में मंजूरी मिल गई थी. सीडब्ल्यूसी ने दावा किया कि राज्यों को पर्याप्त मात्रा में टीके उपलब्ध नहीं कराये गए.

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