Friday , 16 April 2021

शासन की नई नीति में मुआवजा वितरण मनमाना

भोपाल (Bhopal) . प्रदेश के इंदिरा सागर बांध विस्थापितों को मुआवजा वितरण की नई नी‎ति से विस्थापित असंतुष्ठ है. उनका कहना है ‎कि नई नी‎ति में मनमाने तरीके से मुआवजा ‎ का निर्धारण हो रहा है, जो कि सही नहीं है. इस मामले को लेकर नर्मदा बचाओ आंदोलन की चितरूपा पालित ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की है. इसके जरिये इंदिरा सागर बांध विस्थापितों को मुआवजा वितरण की नीति पर एतराज जाहिर किया गया है. सोमवार (Monday) को मुख्य न्यायाधीश (judge) मोहम्मद रफीक व जस्टिस संजय यादव की युगलपीठ के समक्ष मामला सुनवाई के लिए लगा. कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद 13 जनवरी, 2020 को आगामी सुनवाई किए जाने की व्यवस्था दे दी.

याचिका में कहा गया है कि मध्य प्रदेश शासन की नवीन नीति के तहत मुआवजा वितरण मनमाना है. ऐसा इसलिए क्योंकि जिसकी भूमि जिस श्रेणी की है, उसके अनुरूप मुआवजा नहीं दिया जा रहा है. बेहतर और बदतर, दोनों तरह की भूमि के लिए समान दर से मुआवजा का निर्धारण हो रहा है. इस वजह से जिनकी कृषि योग्य उम्दा भूमि छिन रही है उन्हें और जिनकी भूमि कृषि के लिहाज से उतनी उपजाऊ नहीं थी, दोनों को समान तौर पर मुआवजा मिल रहा है. कायदे से भूमि की श्रेणी के अनुरूप मुआवजा का निर्धारण होना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) के इस सिलसिले में न्यायदृष्टांत हैं. जिन्हें याचिका में रेखांकित किया गया है. मप्र हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त रेंजर के पेंशन प्रकरण का तीन माह में निराकरण करने का निर्देश दिया है. इस निर्देश के साथ जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की एकल पीठ ने याचिका का निराकरण कर दिया है.

रघुनाथगंज रीवा निवासी जवाहरलाल स्वर्णकार की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि वे सितंबर 2006 में वन विभाग के अनूपपुर कार्यालय से रेंजर पद से सेवानिवृत्त हुए थे, उन्हें अभी तक पेंशन नहीं दी जा रही है. उन्होंने पेंशन के संबंध में कई बार अभ्यावेदन दिए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई. एकल पीठ ने जिला कोषालय अधिकारी को तीन माह में पेंशन प्रकरण का निराकरण करने का निर्देश दिया है. इस मामले की पैरवी अधिवक्ता ब्रजेन्द्र मिश्रा ने की.

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