Friday , 27 November 2020

पावर प्लांटों में गहरा सकता है कोयला संकट, आर्थिक तंगी कोयला सप्लाई में बन रही रोड़ा


भोपाल (Bhopal) . प्रदेश की बिजली कंपनी में आर्थिक संकट बनने लगा है. कंपनी के पास बिजली बनाने वाले पॉवर प्लांट को समय पर भुगतान करने के लिए फंड ही नहीं है. ऐसे में पॉवर प्लांट भी बिजली बनाने के लिए कोयले खरीदने में परेशानी महसूस कर रहे हैं. कोल कंपनियां लगातार बकाया पैसा मांग रही है. हर माह करीब 900 करोड़ रुपए मप्र पॉवर जनरेशन कंपनी को कोल कंपनियों को भुगतान करना होता है.

जानकारी के अनुसार कोरोना संक्रमण से पहले ही बिजली बनाने वाली मप्र पॉवर जनरेशन कंपनी की देनदारी वितरण कंपनियों पर थी. दरअसल बिजली वितरण कंपनियां पैसा मप्र पॉवर मैनेजमेंट कंपनी को देती है जहां से सीधे मप्र पॉवर जनरेशन कंपनी को पैसा ट्रांसफर होता है. कोविड-19 (Covid-19) में कंपनियों के पास राजस्व की कमी हुई इस वजह से देनदारी भी बढ़ती गई. इधर कोल कंपनियों ने भी बार-बार बकाया राशि भुगतान को लेकर दवाब बनाना शुरू कर दिया है.

बताया जाता है कि मप्र पॉवर जनरेशन कंपनी का करीब 6 हजार करोड़ से ज्यादा की लेनदारी बन प्रदेश की पॉवर मैनेजमेंट कंपनी पर बन गई है. एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि यदि पैसा समय पर नहीं मिला तो कोयले की सप्लाई बाधित होगी. अभी प्लांट में पर्याप्त कोयला रखा हुआ है इसलिए अधिक समस्या नहीं है. रबी सीजन की वजह से बिजली की डिमांड लगातार बढ़ रही है ऐसे में मप्र पॉवर जनरेशन कंपनी को बिजली उत्पादन पूरी क्षमता से करना पड़ रहा है. फिलहाल प्रदेश की जरूरत का 2700 मेगावाट बिजली का उत्पादन कोल संचालित पॉवर प्लांट में किया जा रहा है.

ये है कोयले की स्थिति

अमरकंटक पॉवर प्लांट- 20 दिन का स्टॉक बचा है यहां हर दिन 3 हजार से 3500 मीट्रिक टन कोयले की खपत है.
बिरसिंहपुर पॉवर प्लांट- 16 दिन का कोल स्टॉक है. हर दिन 20 हजार मीट्रिक टन कोयले की खपत है.
सारणी पॉवर प्लांट- 20 दिन का स्टाक बचा है. हर दिन 18 हजार मीट्रिक टन खपत है.
सिंगाजी पॉवर प्लांट- 20 दिन का स्टाक है फिलहाल 660 मेगावाट की दो यूनिट बंद है इसलिए खपत कम हैं रोजाना यहां 15 हजार मीट्रिक टन खपत हो रही है.