Thursday , 13 May 2021

सीएम स्वेच्छानुदान के नाम पर लाखों का चूना लगाने का मामला

जबलपुर, 02 जनवरी . मुख्यमंत्री (Chief Minister) शिवराज सिंह चौहान से स्वेच्छानुदान के नाम पर सैकड़ों लोगों को लाखों रूपए का चूना लगाकर फरार आरोपी अंश तिवारी के खिलाफ आखिरकर पीड़ितों ने एसपी को शिकायत सौंप दी. एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा ने इस मामले में लार्डगंज थाना पुलिस (Police) के साथ क्राईम ब्रांच को मामले की विवेचना सौंपी है. पुलिस (Police) आरोपी की सरगर्मी से तलाश में जुट गई है. ज्ञात हो कि शताब्दीपुराम शहनाई गार्डन के सामने बनी ईडब्ल्यू ूइस बिल्डिंग के जी ब्लॉक के 12 नंबर मकान में रहते हुए शहर के सैकड़ों लोगों को सीएम से स्वेच्छा अनुदान राशि दिलाने के नाम पर 5 से 10 हजार रुपए प्रति व्यक्ति की अवैध उगाही की, आरोपी ने सभी को 28 दिन के भीतर 2 से 3 लाख रुपए दिलाने का भरोसा दिलाया. अवधि के निकल जाने के बाद भी जब लोगों को राशि न मिली तो लोगों ने उसके मोबाईल पर संपर्क किया लेकिन किसी तरह लोगों को झूठे आश्वासन देने के बाद आरोपी अचानक 14 नवंबर को मकान खाली कर फरार हो गया.

खुद को बताया अस्पताल का कर्मचारी……….

मूलत: सागर, दमोह निवासी आरोपी अंश तिवारी ने स्वयं को आगा चौक स्थित एक अस्प्ताल का कर्मचारी बताकर मकान किराए पर लिया था. इसी मकान में रहते हुए आरोपी अंश ने सैकड़ों लोगों को मुख्यमंत्री (Chief Minister) स्वेच्छा अनुदान दिलाने के नाम पर रुपए ऐंठे है. ऊक्त मामले के संबंध में रामसरन चौकसे, गप्पी अग्रवाल, संजीव अग्रवाल, गीता पांडेय आदि ने बताया है कि उन्होंने 23 जुलाई 2020 को 10-10 हजार रुपए नगद और बैंक (Bank) ट्रांसफर कर अंश तिवारी को दिए है. उसने मुख्यमंत्री (Chief Minister) स्वेच्छा अनुदान से और इलाज में खर्च होने के बदले 2 से 3 लाकग रुपए दिलाने की बात की थी. 10 दिन बाद अंश ने बाकायदा सभी के मोबाइल नंबर पर अपू्रवल दिया जिसमें संजीव को 1 लाख 95 हजार, गीता को 1 लाख 80 हजार, रामशरण को 2 लाख 50 हजार, गुलाब बाई 2 लाख 5 हजार लिखकर भेजा जिसकी वे उम्मीद ही लगाए बैठे रहे और आरोपी गायब हो गया.

स्वयं को बताता था इंस्पेक्टर का पुत्र………..

पीड़ितों ने बताया कि सभी आरोपी अंश इंस्पेक्टर का बेटा बताता था. आरोपी जिस एक्टिवा क्रमांक एमपी 20 एसएल 7493 से ही आता जाता था, वह भी उसके नाम पर नहीं थी. वाहन किसी दिनेश पटेल के नाम पर रजिस्टर्ड है. पीड़ितों के अनुसार दिनेश भी आरोपी अंश का साथी था, जिसके साथ लोगों से अनुदान के नाम पर ठगी की गई. बताया गया है कि अंश ने ठगे लोगों से रुपए, फोटो, आधारकार्ड और बैंक (Bank) पासबुक की कॉपी ली है. पीड़ितों के अनुसार आरोपी अंश दावा करता था कि उसके शहर के कई अस्पतालों से संबंध है जहां से सभी के नाम की उपचार की फाइलें तैयार करवाकर भोपाल (Bhopal) मुख्यमंत्री (Chief Minister) निवास भेजी जाएगी. वहां से ही सभी के खाते में रुपए जमा होंगे.

लॉकडाउन (Lockdown) के बाद तेजी से फल फूल रहे गिरोह………..

लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान अधिकांश लोगों की जहाँ नौकरियां गई वहीं कइयों के व्यापार चौपट हो गए. इसी का फायदा उठाकर शहर में मजबूरी का शिकार हुए लोगों को लूटने भेड़ बकरियों की चिटफंड कंपनिया पनपी, कहीं चैन मार्केंटिंग, कहीं ब्रैल लिपि के नाम पर तो कहीं मुख्यमंत्री (Chief Minister) से स्वेच्छा अनुदान राशि दिलाने के नाम पर लूटने वाले गिरोह अब भी सक्रिय है. ज्यादातर जानकारी और सूचना होने के बाद भी पुलिस (Police) के हाथ खाली हैं. यह भी कहा जा सकता है कि जब तक ऐसे गिरोहों की खबर पुलिस (Police) तक पहुंचती है वे नए शहर मे नए मुर्गों को हलाल करने की तैयारी में जुट जाते हैं. सीएम स्वेच्छानुदान के नाम पर ठगी के शिकार लोगलोग 26 दिसंबर को एसपी से शिकायत सौंपने के बाद अब वे प्रतीक्षा में हैं कि कब आरोपी पुलिस (Police) के हत्थे चढ़े और उनकी गाढ़ी कमाई की रकम वापस मिले.

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