Sunday , 11 April 2021

97 साल की बेगम मुनव्वर की ख्वाहिश पूरी करेगी कैप्टन सरकार

चंडीगढ़ (Chandigarh) . पंजाब (Punjab) कैबिनेट ने संगरूर जिला के मलेरकोटला में स्थित मुबारक मंजिल पैलेस के अधिग्रहण, संरक्षण और उपयोग की स्वीकृति दे दी है. पैलेस की मालकिन 97 साल की बेगम मुनव्वर-उल-निसा ने अपनी आखिरी ख्वाहिश के तौर पर सरकार से अधिग्रहण की पेशकश की थी. अधिग्रहण के लिए राज्य सरकार (State government) बेगम मुनव्वर-उल-निसा को 3 करोड़ रुपये देगी. पंजाब (Punjab) कैबिनेट की बैठक में अधिग्रहण का फैसला लिया गया.

मुख्यमंत्री (Chief Minister) कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि यह निर्णय राज्य की समृद्ध विरासत को संरक्षित करने और हमारे गौरवशाली अतीत के साथ युवा पीढ़ी को फिर से जोड़ने में सहायक होगा. बेगम मुनव्वर-उल-निसा ने सरकार को बताया कि यह महल बहुमंजिला विरासती संपत्ति है, जो 150 साल पुरानी है. यह इमारत 32400 वर्ग फुट में फैली हुई है. इसे मलेरकोटला राज्य और पंजाब (Punjab) के इतिहास के अनकहे हिस्से के तौर पर भविष्य के लिए संभालने की जरूरत है.

मुख्यमंत्री (Chief Minister) कार्यालय के प्रवक्ता के अनुसार, इस प्रस्तावित पैलेस की खरीद और मौजूदा अदालती केसों के निपटारे के लिए वर्तमान संभावित वित्तीय देनदारी करीब पांच करोड़ रुपये बनती है. इसकी जमीन की कीमत का मूल्यांकन डिप्टी कमिश्नर संगरूर से करवाया गया है. पर्यटन विभाग की तरफ से भी अपने कंजरवेशन आर्किटेक्ट और चीफ जनरल मैनेजर कम चीफ इंजीनियर के जरिए मूल्यांकन कराया गया है. मलेरकोटला के नवाब शेर मोहम्मद खान ने सरहिंद के सूबेदार का विरोध करते हुए गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादों के पक्ष में अपनी आवाज उठाई थी. इसके चलते पंजाब (Punjab) के इतिहास में उनका एक सम्मानित स्थान है. नवाब शेर मुहम्मद खान ने गुरु गोबिंद सिंह जी के दोनों छोटे साहिबजादों बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह (जो उस समय 7 साल और 9 साल की उम्र के थे) को जीवित ही दीवार में चिनवा देने के आदेश का खुलेआम विरोध किया था.

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