बेटों के बाद दामादों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने की तैयारी में कैप्टन सरकार – Daily Kiran
Thursday , 28 October 2021

बेटों के बाद दामादों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने की तैयारी में कैप्टन सरकार

चंडीगढ़ (Chandigarh) . पंजाब (Punjab) की कांग्रेस सरकार की ओर से कुछ माह पहले दो कांग्रेस विधायकों फतेहगंज सिंह बाजवा और राकेश पांडे के बेटों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने का प्रस्ताव कैबिनेट में पारित हुआ था. इसके बाद अब कैप्टन सरकार में राजस्व मंत्री गुरप्रीत सिंह कांगड़ के दामाद गुरशेर सिंह को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने जा रही है. सूत्रों के अनुसार उन्हें एक्साइज इंस्पेक्टर बनाने की तैयारी है, शुक्रवार (Friday) को मुख्यमंत्री (Chief Minister) कैप्टन अमरिंदर सिंह की अध्यक्षता में होने वाली वर्चुअल कैबिनेट बैठक में एजेंडे को हरी झंडी दी जा सकती है.

हालांकि कार्मिक विभाग का कहना है कि गुरशेर की आर्थिक हालात ऐसी नहीं है कि उन्हें उनके पिता भूपजीत सिंह की जगह पर अनुकंपा के आधार पर नौकरी दी जाए. अब इस पर फैसला कैबिनेट बैठक में होगा. गौरतलब है कि भूपजीत सिंह उस समय चर्चा में आए थे, जब पिछली कैप्टन सरकार के दौरान पंजाब (Punjab) लोक सेवा आयोग के तत्कालीन चेयरमैन रवि सिद्धू को उन्होंने पांच लाख रुपये रिश्वत के मामले में रंगे हाथों पकड़वाया था. इसके बाद में भूपजीत का हार्ट अटैक होने के कारण निधन हो गया था. उनका बेटा गुरशेर सिंह राजस्व मंत्री गुरप्रीत कांगड़ का दामाद है.

कांगड़ पिछले कुछ समय से कांग्रेस के अंतर्कलह के बीच कैप्टन अमरिंदर का साथ छोड़कर उनके विरोधी खेमे में दिखाई दे रहे थे, लेकिन पिछले दो सप्ताह से अचानक कैप्टन गुट में दिखाई दे रहे हैं. राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि इसके पीछे बड़ा कारण उनके दामाद को अनुकंपा के आधार पर एक्साइज विभाग में इंस्पेक्टर लगवाना है. कांगड़ ने इसके लिए पिछले साल भी आवेदन किया था लेकिन कार्मिक विभाग के इनकार के बाद मामला लटक गया था.

इसके बाद जब सरकार ने विधायक बाजवा और राकेश पांडे के बेटों को संबंधित विभागों के एतराज के बावजूद नौकरी दी गई,तब कांगड़ ने फिर से अपने दामाद को एक्साइज इंस्पेक्टर लगवाने की फाइल चला दी. हालांकि फतेहगंज सिंह बाजवा ने कांग्रेस में ही उनके बेटे को नौकरी देने को लेकर हुए विरोध के बाद बेटे को दी जाने वाली नौकरी लेने से इंकार कर दिया था परंतु राकेश पांडे ने ऐसा नहीं किया. अब कांगड़ भी उसी श्रेणी में शामिल होने जा रहे हैं. सरकार में एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि अनुकंपा के आधार पर नौकरी केवल उन्हीं को दी जाती है जिनकी परिवार की आर्थिक हालत अच्छी न हो लेकिन भूपजीत सिंह के बेटे के मामले में ऐसी स्थिति दिखाई नहीं दे रही है. उनके पास करोड़ों रुपये की जायदाद है.

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