गोलीबारी में जीवित बची कनाडाई सिख जसप्रीत ने कहा, पुलिस ने ठीक से नहीं किया अपना काम

टोरंटो, 15 फरवरी . पिछले साल कनाडा में गोलीबारी की घटना में जीवित बची एकमात्र सिख महिला, जिसने अपने सामने अपने माता-पिता को मरते हुए देखा था, उसके शरीर में 13 गोलियां लगी हुई थीं, वह न्याय चाहती है. वह कहती है कि पुलिस ने अपना काम ठीक से नहीं किया.

लगभग 50 साल के जगतार सिंह सिद्धू और हरभजन कौर को 20 नवंबर की आधी रात से ठीक पहले ओंटारियो प्रांत में कैलेडन-ब्रैम्पटन सीमा पर उनके किराये के घर पर 20 से ज्यादा बार गोली मारी गई थी.

जहां सिद्धू की मौके पर ही मौत हो गई, वहीं हरभजन ने अस्पताल में दम तोड़ दिया, उन्हें उनकी बेटी जसप्रीत कौर सिद्धू के साथ अस्पताल ले जाया गया था.

अपने अस्पताल के बिस्तर से सीबीसी न्यूज से बात करते हुए, जसप्रीत ने कहा कि एक आदमी उनके परिवार के कैलेडोन किराये के घर में घुस गया और गोलीबारी शुरू कर दी.

जसप्रीत ने समाचार चैनल को बताया, ”मेरे सामने मेरे पिता को गोली मारी गयी. मैंने अपनी मां की आखिरी चीखें सुनीं और उसके बाद (वहां) एकदम सन्नाटा छा गया. वहां सिर्फ गोलियों की आवाजें थीं. मैं उनसे आखिरी बार भी नहीं मिल पायी.”

उन्होंने कहा, “मैं कुछ नहीं कर पा रही थी, जैसे ही मुझे होश आया मैंने 911 पर फोन किया. ‘पूरे परिवार को गोली मार दी.”

जसप्रीत और उनके भाई गुरदित सिंह कुछ साल पहले छात्र के रूप में कनाडा आए थ. वहीं उनके माता-पिता जुलाई में देश आए थे और इस साल जनवरी में भारत लौटने वाले थे.

जसप्रीत ने कहा कि इस दुखद घटना के लगभग दो महीने बाद भी पुलिस कहती है कि “इसकी जांच चल रही है” और उनके पास कोई ठोस सबूत नहीं है.

घटना के तुरंत बाद एक हत्या की जांच शुरू करते हुए, ओंटारियो प्रांतीय पुलिस ने एक विज्ञप्ति में कहा कि उनका मानना ​​है कि गलत पहचान के संभावित मामले में हुई मौतों में कई संदिग्ध शामिल थे.

जसप्रीत ने कहा, “जो कुछ भी हुआ, पुलिस ने अपना कर्तव्य ठीक से नहीं निभाया. किसी ने हमसे संपर्क नहीं किया, किसी ने कोई जवाब नहीं दिया.”

“हमारे घर पर ऐसा होने से पहले पील पुलिस आई थी. मेरे माता-पिता घर पर थे और उन्हें अंग्रेजी नहीं आती थी. इसलिए उन्होंने पुलिस से बात करने के लिए मेरे भाई के दोस्त से संपर्क किया.”

पील पुलिस के एक प्रवक्ता ने पुष्टि की थी कि होमिसाइड ब्यूरो ने 16 नवंबर को एक अज्ञात जांच के बारे में परिवार से संपर्क किया था.

“हम कई ईमेल भेज रहे हैं, 2000 से ज्यादा ईमेल कई अधिकारियों को भेजे गए हैं. किसी ने जवाब नहीं दिया. यह मुश्किल है.”

जसप्रीत ने कहा कि पूछताछ करने और पासपोर्ट की जांच करने के बाद पुलिस काफी देर तक ड्राइववे पर थी.

“अगर उन्होंने हमें चेतावनी दी होती तो हम तुरंत वहां से चले जाते,” जसप्रीत ने कहा, वह अपने भाई गुरदित की जान को लेकर डरी हुई है, जो घटना के समय घर पर नहीं था.

जसप्रीत ने सीबीसी से कहा, ”शुक्र है वह घर पर नहीं था. हम नहीं जानते कि क्या हम बाहर जाने पर सुरक्षित हैं. जब भी मेरा भाई बाहर जाता है तो मुझे डर लगता है. हर रात मैं उसे कई बार फोन करती हूं. अगर कोई अजनबी मेरे कमरे में आता है तो मुझे हमेशा डर लगता है.”

उन्होंने कहा, ”मेरी सर्जरी में 18-19 घंटे से ज्यादा का समय लगा और डॉक्टरों को नहीं लगा कि मैं बच पाऊंगी. मुझे अभी भी बैठना, खड़ा होना, चलना सीखना है. कुछ दिन ठीक रहती हैं और कुछ दिन दर्द, बहुत ज्यादा दर्द और पैनिक अटैक से होते हैं.”

कमजोर, लेकिन दृढ़ संकल्प के साथ, जसप्रीत ने कहा कि वह न्याय मिलने तक नहीं रुकेगी.

“अगर आज हमारे साथ ऐसा हुआ तो कल किसी और के साथ भी ऐसा हो सकता है.”

पीके/