Friday , 27 November 2020

उपचुनाव: खुफिया रिपोर्ट ने बढ़ा दी आयोग की चिंता, हिंसा की आशंका, पुलिस बल भी कम मिला


भोपाल (Bhopal) . खुफिया रिपोर्ट ने प्रदेश सरकार (Government) के साथ-साथ चुनाव आयोग की चिंता बढ़ा दी है. रिपोर्ट में उपचुनाव वाले क्षेत्रों में शांतिपूर्ण मतदान कराने को चुनौतीपूर्ण बताया गया है. सूत्रों के मुताबिक सरकार (Government) को जानकारी दी गई है कि उपचुनाव में पिछले चुनावों की तुलना में अधिक हिंसक घटनाएं होने की आशंका है. गृह विभाग के अधिकारियों का कहना है कि राज्य के सशस्त्र बल के अलावा पुलिस (Police) और होमगार्ड भी संवेदनशील केंद्रों पर तैनात किए जाएंगे. लायसेंसी हथियारों को थानों में जमा कराया जा रहा है, वहीं आपराधिक प्रवृत्ति वाले व्यक्तियों पर नजर रखी जा रही है.

सीमावर्ती जिलों में चौकसी बढ़ाने के लिए पड़ोसी राज्य के अधिकारियों के साथ बैठक हो चुकी है. मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस और पुलिस (Police) महानिदेशक विवेक जौहरी के साथ बैठक करने के बाद विशेष पुलिस (Police) पर्यवेक्षक एमके दास मैदानी मोर्चा संभाल चुके हैं. बता दें ‎कि ग्वालियर (Gwalior)-चंबल क्षेत्र की 16 विधानसभा सीटों पर मतदान होना है. इन पर प्रचार की गति बढ़ने के साथ-साथ तनाव भी बढ़ने लगा है. पिछले दिनों ग्वालियर (Gwalior) पूर्व से कांग्रेस प्रत्याशी सतीश सिकरवार और भाजपा प्रत्याशी मुन्नालाल गोयल के समर्थकों के बीच हिंसक झड़प भी हो चुकी है. चुनाव आयोग भी उपचुनाव को संवेदनशील मान रहा है. यही वजह है कि सेवानिवृत्त पुलिस (Police) महानिदेशक एमके दास को विशेष पुलिस (Police) पर्यवेक्षक बनाकर तैनात किया गया है.

पुलिस (Police) मुख्यालय ने शांतिपूर्ण मतदान के लिए केंद्रीय अर्द्धसैनिक बल की 204 कंपनियां मांगी थीं, लेकिन 84 कंपनियां यानी करीब 41 फीसद बल ही उपलब्ध कराया गया है. 19 जिलों में एक-एक कंपनी पहुंच भी गई है. प्रदेश में सत्ता का भविष्य ग्वालियर (Gwalior)-चंबल क्षेत्र की 16 विधानसभा सीटों के परिणाम तय करेंगे. भाजपा और कांग्रेस ने इन सीटों पर प्रचार अभियान तेज कर दिया है. बयानों के तीर भी जमकर चल रहे हैं. विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) हों या फिर लोकसभा (Lok Sabha), यहां कानून-व्यवस्था को लेकर स्थिति अन्य जगहों की तुलना में अधिक संवेदनशील रहती है. यही वजह है कि चुनाव आयोग भी पुलिस (Police) मुख्यालय द्वारा मांगा गया बल पूरा उपलब्ध कराने का प्रयास करता है. उपचुनाव की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस (Police) मुख्यालय ने केंद्रीय गृह मंत्रालय (Home Ministry) से केंद्रीय अर्द्धसैनिक बल की 204 कंपनियां मांगी थीं.

काफी विचार-विमर्श के बाद 84 कंपनियां देने पर सहमति बनी है, जबकि शासन ने उप निर्वाचन आयुक्त सुदीप जैन से भी अनुरोध किया था कि वे आयोग के स्तर पर हस्तक्षेप कराकर बल बढ़वाएं, लेकिन बिहार (Bihar) सहित अन्य राज्यों में चुनाव की स्थिति को देखते हुए 84 कंपनियां ही मिल पा रही हैं. निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि 9361 मतदान केंद्रों में से 2718 संवेदनशील हैं. इनमें 2214 ग्रामीण और 504 शहरी क्षेत्रों में हैं. 359 ऐसे क्षेत्र चिन्‍ह‍ित किए गए हैं, जहां विशेष तौर पर नजर रखने की जरूरत है. 1380 ऐसे लोगों की पहचान भी की गई है जो मतदाताओं को डरा सकते हैं.