ब्रोकरेज फर्मों पर एक ही गलती के लिए बार-बार नहीं लगेगा जुर्माना, नए पेनाल्टी सिस्टम पर काम कर रहा सेबी

मुंबई, 27 मार्च . भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) एक नए पेनल्टी सिस्टम पर काम कर रहा है, जो ब्रोकरेज फर्मों को एक ही उल्लंघन के लिए कई बार जुर्माना भरने से सुरक्षा प्रदान करेगा.

पिछले एक साल से चर्चा में रहे इस प्रस्ताव का उद्देश्य अलग-अलग स्टॉक एक्सचेंजों को एक ही चूक के लिए अलग-अलग दंड लगाने से रोकना है.

एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट के अनुसार, सेबी इस नियम को लागू करने के लिए स्टॉक एक्सचेंजों के साथ बातचीत कर रहा है, जिससे ब्रोकरों पर वित्तीय बोझ कम करने में मदद मिलेगी.

फिलहाल, ब्रोकरेज फर्मों को एक ही विनियामक उल्लंघन के लिए कई एक्सचेंजों से दंड का सामना करना पड़ सकता है.

उदाहरण के लिए, अगर कोई ब्रोकर समय पर तकनीकी गड़बड़ी की रिपोर्ट करने में विफल रहता है, क्लाइंट फंड का निपटान नहीं करता है, या निवेशकों की शिकायतों का समाधान करने में विफल रहता है, तो सभी स्टॉक एक्सचेंज अलग-अलग जुर्माना लगा सकते हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे ब्रोकरों पर भारी जुर्माना बोझ पड़ता है.

सेबी अब दंड को सुव्यवस्थित करने और ब्रोकरों के लिए व्यापार करने में आसानी के लिए एक रूपरेखा पर काम कर रहा है.

हालांकि, एनडीटीवी प्रॉफिट के अनुसार, इस नए सिस्टम को कब लागू किया जाएगा, इसके लिए अभी कोई निश्चित समयसीमा नहीं है.

इस बीच, बाजार नियामक ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए डिस्क्लोजर की सीमा को 25,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 50,000 करोड़ रुपये करने को मंजूरी दे दी. इस सप्ताह की शुरुआत में मुंबई में आयोजित सेबी बोर्ड की बैठक के बाद इस निर्णय की घोषणा की गई.

नियामक ने कहा कि नकद इक्विटी बाजार में ट्रेडिंग वॉल्यूम में तेज वृद्धि के कारण संशोधन जरूरी था क्योंकि पिछली सीमा वित्त वर्ष 2022-23 में निर्धारित की गई थी, इसलिए बाजार में ट्रेडिंग वॉल्यूम दोगुना से अधिक हो गया था.

सेबी ने कहा, “वित्त वर्ष 2022-23 (जब सीमाएं निर्धारित की गई थीं) और चालू वित्त वर्ष 2024-25 के बीच नकद इक्विटी बाजार में ट्रेडिंग वॉल्यूम दोगुना से अधिक हो गया है. इसके मद्देनजर, बोर्ड ने लागू सीमा को वर्तमान 25,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 50,000 करोड़ रुपये करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी.”

सेबी ने 24 अगस्त 2023 को जारी सर्कुलर में 25,000 करोड़ रुपये की सीमा तय की थी.

नियामक ने बताया है कि अब भारतीय बाजार में इक्विटी में 50,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश करने वाले एफपीआई को 24 अगस्त 2023 के सर्कुलर के अनुरूप एडिशनल डिस्क्लोजर करने की जरूरत भी होगी, जो पहले किसी एक कॉर्पोरेट समूह में उसके कुल इक्विटी एयूएम का 50 प्रतिशत से अधिक निवेश करने वाले एफपीआई के लिए अनिवार्य था.

इन डिस्क्लोजरों का उद्देश्य धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) और संबंधित विनियमों का अनुपालन सुनिश्चित करना है. इसका प्राथमिक उद्देश्य निवेश के संभावित दुरुपयोग को रोकना और वित्तीय प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखना है.

एसकेटी/एकेजे