विचार मंथन / धर्म परिवर्तन का जिन्न

(लेखक-सिद्वार्थ शंकर/ )
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में हिंदुओं के धर्म परिवर्तन का बड़ा मामला सामने आया है. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) एटीएस के मुताबिक, दिल्ली से दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इन लोगों ने उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में 1000 से अधिक हिंदुओं का धर्म परिवर्तन करवाया, इनमें गरीब और पिछड़ों के साथ ही बेघर, मूक-बधिर और बेसहारा महिलाएं शामिल हैं.

गाजियाबाद (Ghaziabad) में दर्ज एक केस की जांच के बाद एक एक कर परतें खुलती चली गईं और अब यह बड़ा खुलासा हुआ. यूपी के एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार के अनुसार, गिरफ्तार कर आरोपियों को लखनऊ (Lucknow) लाया जा रहा है. मुख्य आरोपी ने खुद भी अपना धर्म परिवर्तन कर रखा है. यूपी एटीएस को आशंका है कि इस काम में विदेश फंडिंग भी लगी हो सकती है.

कहा जा रहा है कि नोएडा (Noida) के एक मूक बधिर स्कूल के भी 18 बच्चों का धर्मांतरण कराया गया. यह रैकेट दो साल से चल रहा था. लोगों को डरा धमका कर और लालच देकर धर्मांतरण करवाया जाता था. पकड़े गए दोनों आरोपियों के नाम मोहम्मद उमर गौतम और मुफ्ती काजी जहांगीर कासमी बताए गए हैं, जो दिल्ली के जामिया नगर इलाके के रह रहे थे. आशंका जताई जा रही है कि इन आरोपियों के तार देशभर में हो सकते हैं. मोहम्मद उमर गौतम और मुफ्ती काजी जहांगीर कासमी को पिछले दिनों डांसना के एक मंदिर से पड़ा गया था. दोनों से पूछताछ में नए खुलासे हुआ.

मोहम्मद उमर गौतम पहले हिंदू था. वह मुफ्ती काजी जहांगीर कासमी से मिला, जो पहले से इस्लामी दावा नामक संस्था चला रहा था. इसका रैकेट नोएडा (Noida) , मथुरा (Mathura) और कानपुर (Kanpur) में फैला है. माना जा रहा है कि रैकेट के पीछे और भी लोग हो सकते हैं. यूपी में जिस पैमाने पर धर्मांतरण का मामला सामने आया है, वह चौंकाने वाला जरूर है. दो साल से कुछ लोग अपने मंसूबे को अंजाम दे रहे थे और भनक किसी को नहीं लगी. इसमें प्रशासन की भूमिका भी संदेह के घेरे में है.

सवाल यह भी है कि आखिर धर्मांतरण इतनी आसानी से कैसे हो जा रहा है. इसमें एक सबसे बड़ी गलती हिंदू समाज को शैक्षिक, धार्मिक मामलों में कानूनन हीन बनाए रखना है. भारत में हिंदुओं को अपने मंदिरों और अपनी शिक्षा संस्थाओं पर दूसरों के समान अधिकार नहीं हैं. इसीलिए हिंदू बच्चे दूसरे धर्मांवलंबियों की तुलना में वैचारिक रूप से असहाय से होते हैं. उन्हें शिकार बनाने में जिहादियों, कम्युनिस्टों या ईसाई एनजीओ आदि विविध तत्वों को आसानी होती है. यह आसानी उन्हें गैर-हिंदुओं को पकडऩे में नहीं होती. हिंदू लड़के-लड़कियां विवेकहीन, सूखी, भौतिकवादी शिक्षा के कारण धर्म-संस्कृति की मूलभूत बातों से भी अनभिज्ञ रहते हैं.

पक्षपाती सेक्युलर शिक्षा के कारण वे नहीं जान पाते कि कई मतवादों की मूल प्रतिज्ञाएं हिंदू हितों के विरुद्ध हैं. फलत: वे अपने जीवन में अहितकारी निर्णय लेते रहते हैं. प्रत्येक राष्ट्र की एक भूमि और संस्कृति होती है. इतिहास भी होता है. राष्ट्र के निवासियों की अपनी भूमि और संस्कृति के प्रति श्रद्धा होती है. भूमि, संस्कृति और इतिहास के प्रति गौरव बोध से राष्ट्र मजबूत होते हैं. भारत के लोगों के लिए यह भूमि माता है. धर्मांतरित व्यक्ति की अपनी भूमि और संस्कृति के प्रति श्रद्धा बदल जाती है. जिनका धर्म परिवर्तन होता है उनका अपना अतीत नष्ट होता है. अपना इतिहास कुचल जाता है.

धर्मांतरण अंग्रेजी राज के समय से ही राष्ट्रीय चिंता का विषय है. मिशनरी संगठन उपचार, शिक्षा आदि सेवाओं के बदले गरीबों का धर्मांतरण कराते हैं. भारत में धर्मांतरण का मुख्य निशाना आदिवासी हैं. आदिवासी बहुल इलाकों के साथ अन्यत्र भी उनकी सक्रियता है. गोवा पर पुर्तगाली कब्जे के बाद पादरी जेवियर ने हिंदुओं का भयंकर उत्पीडऩ किया. गोवा में ईसाई कानून 1561 में लागू हुए. हिंदू प्रतीक धारण करना भी अपराध था. तिलक लगाना और घर में तुलसी का पौधा रोपना भी मृत्युदंड का अपराध बना.

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