Monday , 26 July 2021

बीकेयू नेता युद्धवीर सिंह को अहमदाबाद में पुलिस ने किया गिरफ्तार

नई दिल्ली (New Delhi) . भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव युद्धवीर सिंह को शुक्रवार (Friday) को गुजरात (Gujarat) पुलिस (Police) ने अहमदाबाद (Ahmedabad) में प्रेस वार्ता के दौरान गिरफ्तार कर लिया. भाकियू से जुड़े किसानों ने इस गिरफ्तारी के विरोध में दिल्ली मेरठ (Meerut) एक्सप्रेस-वे पूरी तरह बंद करने की घोषणा की है. किसानों का कहना है कि जब तक युद्धवीर सिंह को रिहा नहीं किया जाता तब तक एक्सप्रेस-वे को बंद ही रखा जाएगा. किसान इस तरह से डरने वाले नहीं हैं.

जानकारी के अनुसार, नए कृषि कानूनों के खिलाफ में दिल्ली की सीमाओं पर लगातार चार महीने से किसानों का हल्लाबोल जारी है. कानूनों को रद्द कराने पर अड़े किसान इस मुद्दे पर सरकार के साथ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर चुके हैं. इसके लिए किसान नेता देशभर में घूम-घूमकर किसान महापंचायतों के जरिये लोगों को एकजुट कर रहे हैं. किसानों ने सरकार से जल्द उनकी मांगें मानने की अपील की है. वहीं सरकार की तरफ से यह साफ कर दिया गया है कि कानून वापस नहीं होगा, लेकिन संशोधन संभव है. दिल्ली पुलिस (Police) ने शुक्रवार (Friday) को केन्द्र के तीन नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठनों द्वारा बुलाए गए 12 घंटे के ‘भारत बंद’ के मद्देनजर गाजीपुर बॉर्डर से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-24 को दोनों तरफ से बंद कर दिया. संयुक्त किसान मोर्चा ने बंद का आह्वान किया है.

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस (Police) ने ट्वीट किया, ”गाजीपुर बॉर्डर पर एनएच-24 (दोनों परिवहन मार्ग) पर यातायात बंद है. गाजीपुर बॉर्डर पर एक तरफ के परिवहन मार्ग को यातायात के लिए 15 मार्च को खोला गया था. वहीं किसानों का प्रदर्शन शुरू होने के बाद से ही गाजियाबाद (Ghaziabad) से दिल्ली की ओर आने वाला अन्य मार्ग बंद है. दिल्ली की तीनों सीमाओं सिंघु, गाजीपुर और टीकरी पर किसानों के आंदोलन के चार महीने पूरे होने पर किसानों ने राष्ट्रव्यापी बंद सुबह छह बजे से शुरू होगा और शाम छह बजे तक चलेगा. मोर्चा ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में बंद का आह्वान किया गया है.

गौरतलब है कि मुख्यत: पंजाब, हरियाणा (Haryana) और पश्चिमी उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के हजारों किसान सिंघु, टीकरी और गाजीपुर सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं. वे तीन कृषि कानूनों को पूरी तरह से वापस लेने और उनकी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए कानूनी गारंटी देने की मांग कर रहे हैं.

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