Saturday , 19 June 2021

भाषाई दिक्कत के बावजूद असम और बंगाल में सामाजिक समीकरण साध रहे भाजपा नेता

नई दिल्ली (New Delhi) . पश्चिम बंगाल (West Bengal) और असम के विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) में भाजपा नेता भाषाई दिक्कतों के बावजूद सामाजिक समीकरणों को साधने में जुटे है. प्रचार अभियान में ऐसे नेता भी जोड़े गए हैं जो सामाजिक समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं. यही वजह है कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री (Chief Minister) शिवराज सिंह चौहान का इस बार ज्यादा उपयोग किया जा रहा है. वही आदिवासी क्षेत्रों के लिए केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा को लगाया है. 5 विधानसभाओं के चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चित पश्चिम बंगाल (West Bengal) और असम के चुनाव हैं, जहां भाजपा की सत्ता की मजबूत दावेदारी है. असम में तो वह पहले से ही सत्ता में है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के नेतृत्व में पार्टी के प्रमुख नेता गृह मंत्री अमित शाह, पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के लगातार चुनावी दौरे तो हो ही रहे हैं, लेकिन विभिन्न राज्यों के प्रमुख नेताओं को भी इस बार उनकी उपयोगिता के अनुसार उपयोग प्रचार में उतारा जा रहा है. मुख्यमंत्री (Chief Minister) योगी आदित्यनाथ पहले से स्टार प्रचारक हैं, लेकिन इस बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री (Chief Minister) शिवराज सिंह चौहान को असम और पश्चिम बंगाल (West Bengal) में प्रचार के मोर्चे पर लगाया है.

चौहान के जरिए पार्टी पिछड़ा वर्ग और किसानों के बीच अपनी बात रख रही है. हालांकि भाषाई दिक्कतें हैं, लेकिन चौहान के चेहरे से किसान और पिछड़ा वर्ग का संदेश सामाजिक समीकरणों के लिए काफी उपयोगी है. इसी तरह आदिवासी नेता और केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा उन क्षेत्रों में प्रचार कर रहे हैं जहां आदिवासी ज्यादा है और जीत हार के समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं. हाल में बिहार (Bihar) सरकार में उद्योग मंत्री बने शाहनवाज हुसैन भी अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में प्रचार अभियान में जुटे हुए हैं. केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, स्मृति ईरानी, गजेंद्र सिंह शेखावत, प्रहलाद सिंह पटेल समेत कई नेता भी रणनीति के अनुसार मोर्चा संभाले हुए हैं. पार्टी के एक प्रमुख नेता ने कहा है कि इन दोनों राज्यों में भाषाई दिक्कतें हैं और जिससे दूसरे राज्यों के प्रमुख नेताओं का सीधा संवाद तो नहीं होता है लेकिन नेताओं की पृष्ठभूमि, उनका कामकाज और सामाजिक समीकरण काफी मददगार होते हैं.

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