
Bhopal , 15 मई . धार भोजशाला मामले में Madhya Pradesh हाईकोर्ट के फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति और धार्मिक संगठनों में प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है. Chief Minister मोहन यादव और मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक बताया है. दोनों नेताओं ने कहा कि अदालत ने भोजशाला की धार्मिक पहचान को स्वीकार किया है. उन्होंने लोगों से सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील भी की.
Madhya Pradesh Government में मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने हाईकोर्ट के फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि ये ऐतिहासिक फैसला है. भोजशाला को लेकर कोर्ट का फैसला आया है, इससे हम उत्साहित हैं. हमें बताया जाता था कि भोजशाला सनातन की प्रतीक है. हमारे पूर्वजों द्वारा इसका निर्माण कराया गया था. मां सरस्वती की यह भोजशाला है. इस फैसले के बाद नियमित रूप से पूजा-पाठ करने में आसानी होगी.
वहीं, Bhopal में मीडिया से बातचीत में सीएम ने कहा कि न्यायालय ने माना कि राजा भोज ने वाग्देवी के स्थान के माध्यम से इस स्थल की महत्ता को विकसित किया था. मैं इस फैसले का स्वागत करता हूं और प्रदेशवासियों को इसकी बधाई भी देता हूं.
उन्होंने कहा कि सभी लोगों से अपील है कि इस निर्णय को स्वीकार करके ऐसा समाधान दें, जो सामाजिक सौहार्द्र का उदाहरण बने. अयोध्या में बने राम मंदिर के समय भी सामाजिक सौहार्द्र की मिसाल देखने को मिली थी. उसी तरह Madhya Pradesh भी दूसरा उदाहरण बन सकता है. हम आपसी भाईचारे के तहत एक स्थायी समाधान निकालें.
सीएम मोहन यादव ने कहा कि लोकतंत्र में सबसे बड़ा स्थान न्यायालय का है. न्यायालय के निर्णय को मैं स्वीकार करता हूं और कोई कठिनाई नहीं हुई तो आगे चलकर इस दिशा में और ठोस कदम उठाए जाएंगे. भविष्य में ऐसे स्थानों को और गौरवान्वित किया जाएगा.
उन्होंने यह भी कहा कि वाग्देवी की जो प्रतिमा विदेश में है, उसे कानून के अनुसार वापस लाने का प्रयास किया जाएगा.
Madhya Pradesh हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने अपने अहम फैसले में कहा कि भोजशाला एक मंदिर है और हिंदू समुदाय का वहां पूजा करने का अधिकार कभी समाप्त नहीं हुआ. अदालत ने विवादित स्थल को लेकर वर्षों से चली आ रही प्रशासनिक व्यवस्था को भी रद्द कर दिया.
जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने Friday को यह फैसला सुनाया.
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एएमटी/वीसी