Tuesday , 27 October 2020

केन-बेतवा लिंक परियोजना पर बड़ी बैठक कल, केंद्र, उप्र और मप्र सरकार के अफसर करेंगे वर्चुअल बैठक


भोपाल (Bhopal) . बुंदेलखंड क्षेत्र की दशा और दिशा बदलने वाली बहुप्रतीक्षित केन-बेतवा परियोजना को लेकर बुधवार (Wednesday) को बड़ी बैठक होने जा रही है. बैठक में केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के सचिव, मप्र के जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव एसएन मिश्रा, उप्र के प्रमुख सचिव शामिल होंगे. बैठक वर्चुअल होगी. जिसमेंं परियोजना को शुरू करने पर चर्चा होगी. दोनों राज्यों के अधिकारी अपना-अपना पक्ष रखेंगे. केंद्रीय सचिव वर्चअल बैठक का एजेंडा भारत सरकार (Government) के समक्ष रखेंगे. इस बैठक में कोशिश होगी कि केन-बेतवा परियोजना को लेकर उप्र और मप्र की आपत्तियों का निराकरण किया जा सके.

मप्र के बुंदेलखंड में केन एवं बेतवा नदी पर प्रस्तावित लिंक परियोजना केंद्री, उप्र और मप्र सरकार (Government) की संयुक्त परियोजना है. इसमें केंद सरकार (Government) 60 फीसदी और दोनों राज्य 20-20 फीसदी परियोजना खर्च देंगे. यह परियोजना पिछले 15 साल से लंबित है. पानी की हिस्सेदारी को लेकर उप्र की मांग बढ़ती जा रही है. जिसको लेकर मप्र तैयार नहीं है. हालांकि केंद्र सरकार (Government) का झुकाव उप्र की ओर है, लेकिन मप्र किसी भी स्थिति में कम पानी लेने को तैयार नहीं है.

2005 से जारी है बैठकों का दौर

केन-बेतवा लिंक परियोजना के संबंध में अगस्त 2005 में एमओयू हुआ था. इसके तहत 90 प्रतिशत राशि केन्द्र सरकार (Government) व्यय करेगी. राज्य सरकार (Government) का हिस्सा 10 प्रतिशत रहेगा. इस परियोजना से मप्र की 6.53 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी. जिसमें केन बेसिन में 4.47 लाख हेक्टेयर मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) का तथा 2.27 लाख हेक्टेयर उत्तरप्रदेश (Uttar Pradesh) का कृषि योग्य सिंचित क्षेत्र लाभन्वित होगा. बेतवा बेसिन से मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के 2 लाख 6 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को लाभ मिलना है. एमओयू के तहत परियोजना से उत्पन्न होने वाली बिजली का संपूर्ण उपयोग मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) द्वारा किया जाएगा. परियोजना की कुल लागत 35 हजार 111 करोड़ रूपये आंकलित की गई है. एमओयू के तहत उत्तरप्रदेश (Uttar Pradesh) को केन कछार से 1700 मिलियन घन मीटर पानी आवंटित किया जाना है, एमओयू के तहत पानी आवंटिन पर दोनों राज्यों की सहमति थी. इसमें रबी सीजन के लिए 547 मिलियन घन मीटर तथा खरीफ सीजन में 1153 मिलियन घन मीटर जल का आवंटन होना था. इस बीच उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में भाजपा की सरकार (Government) आने के बाद केन-बेतवा परियोजना में पानी का हिस्सा बढ़ाने की मांग कर डाली.