Skip to content
Tuesday, 20 October 2026
Hindi Daily Kiran India, Rajasthan, business, sports, tech और अन्य श्रेणियों की ताज़ा हिन्दी ख़बरें।
BREAKING
राजनीति,राष्ट्रीय

भरत तिवारी एनकाउंटर केस: रोहिणी आचार्य का सवाल, ‘पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?’

भरत तिवारी एनकाउंटर केस: रोहिणी आचार्य का सवाल, ‘पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?’

Patna, 24 जून . राजद अध्यक्ष लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्या ने भरत तिवारी कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में बिहार Government द्वारा न्यायिक जांच के आदेश पर सवाल उठाते हुए इसे ‘जनाक्रोश को ठंडा करने की कवायद’ करार दिया. उन्होंने कहा कि इस मामले में अब तक भरत तिवारी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं किया जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है.

रोहिणी आचार्या ने Wednesday को social media प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि भरत तिवारी फर्जी मुठभेड़ मामले में गठित न्यायिक जांच से त्वरित रूप से कुछ स्पष्ट या उजागर होने की संभावना नहीं दिखती. उन्होंने आरोप लगाया कि न्यायिक जांच की प्रक्रिया लंबी चल सकती है, जिससे इस ‘जघन्य हत्याकांड’ के दोषियों की जवाबदेही तय होने में काफी समय लग सकता है. मेरी राय में न्यायिक जांच का यह आदेश जनाक्रोश को ठंडा करने की Government की एक कवायद का हिस्सा है.

पिछले Lok Sabha चुनाव में सारण से राजद के टिकट पर चुनाव लड़ चुकी रोहिणी ने कहा कि दलितों, वंचितों, शोषितों, पिछड़ों और हाशिए पर खड़ी आबादी के अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए जान गंवाने वाले भरत तिवारी के परिजनों को न्याय दिलाने के लिए कई लोग जमीन पर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन Government अब तक सबसे बुनियादी सवालों का जवाब नहीं दे रही है.

उन्होंने Government से सवाल करते हुए कहा कि भरत तिवारी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आखिर कहां है और अब तक उसे सार्वजनिक क्यों नहीं की गई. उनका आरोप है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक करने में हो रही देरी की आड़ में Government और Police किसी को बचाने की कोशिश कर रही है.

रोहिणी आचार्या ने कहा कि इस मामले से जुड़ी कई याचिकाएं विभिन्न न्यायालयों में दायर हैं, और उन याचिकाओं की कानूनी मजबूती के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट बेहद जरूरी दस्तावेज है. ऐसे में रिपोर्ट सार्वजनिक न करना संदेह को और गहरा करता है. उन्होंने यह भी कहा कि भरत तिवारी के परिजन मृतक के मोबाइल फोन की डिटेल्स सार्वजनिक किए जाने की भी मांग कर रहे हैं. परिजनों का दावा है कि मृतक का मोबाइल फोन फिलहाल Police के कब्जे में है और उसमें इस कथित फर्जी मुठभेड़ के आदेश देने वालों से जुड़े अहम साक्ष्य, जानकारियां और व्हाट्सएप चैट मौजूद हो सकते हैं.

रोहिणी ने आरोप लगाया कि Police इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है. उन्होंने सवाल उठाया कि कहीं ऐसा तो नहीं कि अपनी ‘काली करतूत’ पर पर्दा डालने के लिए मोबाइल फोन, उसमें मौजूद डेटा और व्हाट्सएप चैट को नष्ट कर दिया गया हो.

रोहिणी आचार्या ने कहा कि Government को न्यायिक जांच के साथ-साथ मामले से जुड़े सभी अहम दस्तावेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मोबाइल डेटा की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि भरत तिवारी के परिजनों को न्याय मिल सके और पूरे मामले की निष्पक्ष सच्चाई सामने आ सके.

–

एमएनपी/एसके

Share